केन्‍द्रीय वित्‍त निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से न्यू डेवलपमेंट बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की छठी वार्षिक बैठक में भाग लिया। इस बैठक में ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के गवर्नर , ऑल्टरनेट गवर्नर भी उपस्थित थे। वर्तमान महामारी के कारण, एनडीबी की यह वार्षिक बैठक वर्चुअल मोड में आयोजित की गई थी। इस वर्ष की वार्षिक बैठक का विषय था “न्यू डेवलपमेंट पेरडाइम: द इवोल्यूशन ऑफ इन्फ्रास्ट्रक्चर”, जिसे इसके दायित्‍व के साथ अच्छी तरह से जोड़ा गया है।

वित्त मंत्री ने महामारी के प्रभाव को सीमित करने और बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाने की भारत की त्वरित प्रतिक्रिया को रेखांकित किया, जिसके परिणामस्वरूप ‘तेजी से और लगातार स्‍वास्‍थ्‍य लाभ’ मिल रहा है। श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है और अब तक, भारत ने 80 देशों को भारत में निर्मित कोविड-19 की 6 करोड़ 39 लाख (63.9 मिलियन) डोज़ की आपूर्ति की है, जिसमें से एक करोड़ 04 लाख (10.4 मिलियन) डोज़ सहायता के रुप में दी गई हैं।

पिछले छह वर्षों में बैंक की उपलब्धियों और प्रगति को स्वीकार करते हुए, श्रीमती सीतारमण ने कोविड महामारी से लड़ने में सदस्य देशों की सहायता करने के लिए 10 अरब डॉलर के आपात सहायता कार्यक्रम के माध्यम से काउंटरसाइक्लिकल ऋण देने में एनडीबी की भूमिका को उजागर किया। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि एनडीबी को पर्याप्त पूंजी का प्रावधान करके, उच्च गुणवत्ता वाले शासन और विवेकपूर्ण प्रबंधन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग को बनाए रखना चाहिए और उसमें सुधार लाना चाहिए।

वित्त मंत्री ने एनडीबी को निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने, अधिक नवीन वित्त पोषण संरचनाओं का पता लगाने, अन्य एमडीबी के साथ सह-वित्तपोषण के अवसरों की खोज करने, बैंक योग्य परियोजनाओं की एक पाइपलाइन विकसित करने और पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे की स्थिरता को बढ़ाने आदि के लिए प्रोत्साहित किया।

बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में विकास वित्तीय संस्थानों (डीएफआई) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने उल्लेख किया कि भारत अगले तीन वर्षों में 69 अरब डॉलर के ऋण लक्ष्य के साथ लगभग 3 अरब डॉलर की प्रदत्‍त पूंजी के साथ एक नया डीएफआई बनाने जा रहा है। उन्होंने एनडीबी को इन संस्थानों के साथ एक सहयोगात्मक संबंध विकसित करने का सुझाव भी दिया जो अधिक से अधिक परिणाम प्राप्त करने के लिए अपनी विकास प्राथमिकताओं को साझा करते हैं।

बहुपक्षीय विकास बैंक, एनडीबी की स्थापना ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) द्वारा 2014 में की गई थी, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स के साथ-साथ दुनिया के अन्य ईएमडीसी में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना था। बैंक का परिचालन 2015 में शंघाई, चीन में इसके मुख्यालय के साथ किया गया। एनडीबी ने अब तक 6,924 मिलियन डॉलर की राशि के साथ भारत की 18 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

न्यू डेवलपमेंट बैंक के बारे में

साल 2012 में नई दिल्ली में आयोजित चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचा एवं सतत् विकास परियोजनाओं के लिये न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना पर विचार किया गया। वर्ष 2014 में ब्राज़ील के फोर्टालेजा में छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। फोर्टालेजा घोषणा में कहा गया कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करेगा और वैश्विक विकास के लिये बहुपक्षीय तथा क्षेत्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रयासों को पूरा करके स्थायी एवं संतुलित विकास में योगदान देगा।

न्यू डेवलपमेंट बैंक के संचालन के प्रमुख क्षेत्र हैं- स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन, अवसंरचना, सिंचाई, स्थायी शहरी विकास और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग। न्यू डेवलपमेंट बैंक सभी सदस्य देशों के समान अधिकारों के साथ ब्रिक्स सदस्यों के बीच एक परामर्श तंत्र पर काम करता है। इस संस्था का मुख्यालय शंघाई (चीन) में है।