भारत ने रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए एक और उपलब्धि आपने नाम किया।भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम के जरिए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। परीक्षण के दौरान इसकी स्पीड दो किलोमीटर प्रति सेकेंड रही और यह 20 सेकेंड तक हवा में रहा। इसकी सहायता से लंबी दूरी तक मार करने वाले मिसाइल सिस्टम विकसित करने के साथ ही अंतरिक्ष में सैटलाइट्स भी कम लागत पर लांच किया जा सकता है। इससे दुनिया के किसी भी कोने में दुश्मन के ठिकानों को घंटे भर के भीतर में निशाना बनाया जा सकता है। इससे पहले जून 2019 में हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी डिमॉन्‍स्‍ट्रेटर वाहन का पहला परीक्षण किया गया था। इसका इस्तेमाल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने और कम खर्चे में सैटेलाइट लॉन्च करने में किया जाएगा।

इस मौके पर डीआरडीओ (ARDO) ने इस मिशन को ऐतिहासिक करार दिया है। संस्था ने ट्वीट कर कहा कि इस मिशन के साथ ही यह साबित हो गया है कि डीआरडीओ बेहद पेचीदा तकनीक के क्षेत्र में उम्दा प्रदर्शन कर सकता है। उसने कहा, ‘यह औद्योगिक जगत के साथ अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक वाहनों के निर्माण का रास्ता खोलने वाला है।’

इसके अलावा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने DRDO को हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमन्स्ट्रेटर व्हीकल के सफल परीक्षण के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि हमारे वैज्ञानिकों द्वारा विकसित स्क्रैमजेट इंजन की उड़ान को ध्वनि की गति से 6 गुना गति प्राप्त करने में मदद की है। उन्होंने लिखा कि बहुत कम देशों के पास ऐसी क्षमता है।

देश के रक्षामंत्री राजनाथ ने ट्विटर पर बताया कि उन्होंने इस प्रॉजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों से बात की और उन्हें बधाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को उन सभी वैज्ञानिकों पर गर्व है। उन्होंने बताया कि इस सफलता के बाद सभी महत्वपूर्ण टेक्नॉलजी अगले चरण में पहुंच जाएगी।

क्‍या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल?
हाइपरसोनिक मिसाइल वो मिसाइल होती है जो आवाज की रफ्तार से 5 गुना ज्‍यादा तेज चलती है। ये दो प्रकार की होती है। पहली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल और दूसरी हाइपरसोनिक ग्‍लाइड वीइकल। ये मिसाइलें मिनटों में दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्‍वस्‍त कर सकती हैं। यह मिसाइल लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाती है। इसके बाद जमीन या हवा में मौजूद टारगेट को निशाना बनाती है। इन्हें रोकना काफी मुश्किल होता है। साथ ही तेज रफ्तार की वजह से रडार भी इन्हें पकड़ नहीं पाते।

इस लांचिंग की खासियत क्या है?

यह हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरने वाला मानव रहित स्क्रैमजेट सिस्टम है। जिसकी रफ्तार ध्वनि की गति से 6 गुना अधिक है। इसके साथ ही ये आसमान में 20 सेकेंड में लगभग 32.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाता है। बता दें कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंट्रेटर व्हीकल यानी HTDV प्रोजेक्ट DRDO की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। इसका उद्देश्य कई सैन्य और नागरिक लक्ष्यों को सेवाएं देना है। भारत के पास अब बिना विदेशी मदद के हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप करने की क्षमता हो गई है।

HSTDV में क्‍या है खास?
यह स्‍क्रैमजेट एयरक्राफ्ट अपने साथ लॉन्‍ग रेंज और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ले जा सकता है। आवाज से 6 गुना ज्‍यादा तेज रफ्तार का मतलब ये कि दुनिया के किसी भी कोने में दुश्मन के ठिकाने को घंटे भर के भीतर निशाना बनाया जा सकता है। आम मिसाइलें बैलस्टिक ट्रैजेक्‍टरी फॉलो करती हैं। इसका मतलब है कि उनके रास्‍ते को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। इससे दुश्‍मन को तैयारी और काउंटर अटैक का मौका मिलता है जबकि हाइपरसोनिक वेपन सिस्‍टम कोई तयशुदा रास्‍ते पर नहीं चलता।

इस कारण दुश्‍मन को कभी अंदाजा नहीं लगेगा कि उसका रास्‍ता क्‍या है। स्‍पीड इतनी तेज है कि टारगेट को पता भी नहीं चलेगा। यानी एयर डिफेंस सिस्‍टम इसके आगे पानी भरेंगे। आपको बता दें कि फिलहाल अमेरिका, चीन और रूस के पास ही ऐसी मिसाइलें हैं। अमेरिका जहां परंपरागत पेलोड्स पर फोकस कर रहा है। वहीं, चीन और रूस परंपरागत के अलावा न्‍यूक्लियर डिलीवरी पर भी काम कर रहे हैं। दुनिया के किसी देश के पास फिलहाल इसका डिफेंस सिस्‍टम नहीं है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन इस पर रिसर्च कर रहा है।