सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का अरब सागर में एक लक्ष्य को भेदते हुए भारतीय नौसेना के स्वदेशी तरीके से निर्मित स्टील्थ डेस्ट्रॉयर, आईएनएस चेन्नई से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। मिसाइल ने उच्च-स्तरीय एवं अत्यधिक जटिल युक्तियों का प्रदर्शन करने के बाद सुनिदेशित सटीकता के साथ सफलतापूर्वक लक्ष्य को भेदा।

एक “प्रमुख मारक अस्त्र” के रूप मे ब्रह्मोस मे लंबी दूरी पर स्थित नौसेना के सतह के लक्ष्यों को पूरा करने के द्वारा युद्धपोत की अजेयता सुनिश्चित करेगा और इस प्रकार डेस्ट्रॉयर को भारतीय नौसेना का एक और घातक प्लेटफार्म बना देगा। उच्च बहुमुखी ब्रह्मोस को भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन, विकास एवं निर्मित किया गया है।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मौके पर डीआरडीओ, ब्रह्मोस और भारतीय नेवी को बधाई दी।
डीडीआरएंडडी के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों तथा डीआरडीओ, ब्रह्मोस भारतीय नौसेना एवं उद्योग के सभी कार्मिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइलें कई प्रकार से भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं में वृद्धि करेंगी।

ब्रह्मोस सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल की खासियत क्या हैं?

ब्रह्मोस सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल को रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया था। ये दुनिया की सबसे बेहतरीन और तेज मिसाइलों में से एक है।

इस मिसाइल से भारत की सेना दुश्मन के भूमिगत परमाणु बंकर, विमान और पानी के जहाजों को तबाह करने की क्षमता रखती है। सबसे खास बात ये है कि इस मिसाइल को फायर एंड फॉरगेट भी कहा जाता है। दरअसल ये एक गाइडेड मिसाइल है और बेहद ही अचूक है। इस मिसाइल का इस्तेमाल पनडुब्बी, पानी के जहाज, लडाकू विमान और जमीन कहीं से भी किया जा सकता है। ये मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। ये एक सुपरसोनिक मिसाइल है यानी इसकी स्पीड ध्वनि से भी अधिक है। इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है।

डीआरडीओ (DRDO) के बारे में

डीआरडीओ की स्थापना 1958 में रक्षा विज्ञान संगठन के साथ भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठान और तकनीकी विकास और उत्पादन निदेशालय के संयोजन के बाद किया गया। DRDO रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के तहत काम करता है। यह रक्षा प्रणालियों के डिज़ाइन एवं विकास के साथ-साथ तीनों क्षेत्रों के रक्षा सेवाओं की आवश्यकताओं के अनुसार विश्व स्तर की हथियार प्रणाली एवं उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। DRDO सैन्य प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहा है, जिसमें वैमानिकी, शस्त्र, युद्धक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन, इंजीनियरिंग प्रणालियाँ, मिसाइलें, नौसेना प्रणालियाँ, उन्नत कंप्यूटिंग, सिमुलेशन और जीवन विज्ञान शामिल है।