सतत विकास लक्ष्‍य 9 – उद्योग, नवाचार और बुनियादी सुविधाएं

संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की ओर से सितंबर 2015 में अपनी आम सभा में 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को पारित करने के बाद यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) को कार्यक्रमों की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी सौंप दिया गया। सतत् विकास लक्ष्य 1 जनवरी, 2016 से प्रभाव में आ गए और अगले 15 सालों तक प्रभावी रहेंगे।

यूएनडीपी 170 देशों में इन लक्ष्यों की प्राप्ति पर नजर रखेगी। SDGs लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये सरकारी, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और सभी लोगों को आपसी सहयोग से काम करना होगा। आइए इस कड़ी में SDG 9 के बारे में बात करेंगे। इसका लक्ष्य सबके लिए उद्योग, नवाचार और बुनियादी सुविधाएं का आवश्यकताओं की पूर्ति करना हैं। सतत् विकास के 9 वें लक्ष्य में उद्योग, नवाचार और बुनियादी सुविधाएं में वृद्धि हेतु उत्कृष्ट कार्य के बारे में व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कुछ विशिष्ट उदेश्य तय किये गये हैं।

सतत विकास लक्ष्‍य 9 के उद्देश्‍य
क्षेत्रीय और सीमाओं के आर-पार बुनियादी सुविधाओं सहित गुणवत्‍तापूर्ण, विश्‍वसनीय, टिकाऊ और जानदार बुनियादी सुविधाओं का विकास करना जिससे आर्थिक विकास हो और मानव कल्‍याण को सहारा मिले और जिसमें सबके लिए संवहनीय एवं समान सुलभता पर जोर हो।

समावेशी और सतत औद्योगीकरण को प्रोत्‍साहन तथा 2030 तक रोजगार और सकल घरेलू उत्‍पाद में राष्‍ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार उद्योग की हिस्‍सेदारी में बहुत अधिक वृद्धि तथा सबसे कम विकसित देशों में उसकी हिस्‍सेदारी दोगुनी करना।

विशेषकर विकासशील देशों में लघु उद्योगों और अन्‍य उद्यमों के लिए वित्‍तीय सेवाओं सस्‍ते ऋण सहित की सुलभता बढ़ाना और उन्‍हें मूल्‍य श्रृंखला तथा बाजारों के साथ जोड़ना।
2030 तक बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना तथा उद्योगों को टिकाऊ बनाने के लिए उनका उन्‍नयन करना जिससे वे संसाधन उपयोग कुशलता बढ़ाएं और प्रदूषण रहित एवं पर्यावरण की दृष्टि से उत्‍तम टैक्‍नॉलॉजी एवं औद्योगिक प्रक्रियाएं अधिक अपनाएं तथा सभी देश अपनी-अपनी क्षमताओं के अनुसार कदम उठाएं।

वैज्ञानिक अनुसंधान बढ़ाना, सभी देशों विशेषकर विकासशील देशों में औद्योगिक क्षेत्र की प्रौद्योगिक क्षमताओं का उन्‍नयन करना। 2030 तक नवाचार को प्रोत्‍साहन देना तथा प्रति 10,00,000 लोगों पर अनुसंधान और विकास कार्यों की संख्‍या में तथा अनुसंधान और विकास पर सार्वजनिक और निजी खर्च में बहुत अधिक वृद्धि करना।

अफ्रीकी देशों, सबसे कम विकसित देशों, भूमि से घिरे विकासशील देशों और लघु द्वीपीय विकासशील देशों के लिए अधिक वित्‍तीय, टैक्‍नॉलॉजी संबंधी और तकनीकी समर्थन के जरिए विकासशील देशों में टिकाऊ और जानदार बुनियादी सुविधाओं के विकास में मदद करना।

विकासशील देशों में घरेलू प्रौद्योगिकी विकास, अनुसंधान और नवाचार को समर्थन देना। इसके लिए औद्योगिक विविधता लाने तथा जिंसों में मूल्‍य संवर्धन हेतु उपयुक्‍त नीतिगत माहौल सुनिश्चित करना शामिल है।

सूचना और संचार टैक्‍नॉलॉजी को बहुत अधिक सुलभ करना एवं 2020 तक सबसे कम विकसित देशों में सब जगह सस्‍ती दर पर इंटरनेट की सुविधा सुलभ कराने के लिए प्रयास करना।

भारत और लक्ष्‍य 9
सरकार के मेक इन इंडिया और स्‍टार्टअप इंडिया जैसे प्रमुख प्रयासों तथा पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय श्रमेव जयते कार्यक्रम के बल पर नवाचार और सतत् औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को गति मिल रही है।

मेक इन इंडिया 

मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत 25 सितंबर, 2014 को देशव्यापी स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से की गई थी। दरअसल औद्योगिक क्रांति ने इस संदर्भ में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की और संपूर्ण विश्व को यह दिखाया कि यदि किसी देश का विनिर्माण क्षेत्र मज़बूत हो तो वह किस प्रकार उच्च आय वाला देश बन सकता है।  इस पहल के माध्यम से भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये सरकार ने मुख्यतः 3 उद्देश्य निर्धारित किये थे

अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिये इसकी विकास दर को 12-14 प्रतिशत प्रतिवर्ष तक बढ़ाना।

वर्ष 2022 तक अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित 100 मिलियन रोज़गारों का सृजन करना।

यह सुनिश्चित करना कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान वर्ष 2025 (जो कि संशोधन से पूर्व वर्ष 2022 था) तक बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाए।

‘मेक इन इंडिया’ पहल में अर्थव्यवस्था के 25 प्रमुख क्षेत्रों जैसे- ऑटोमोबाइल, खनन, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

स्‍टार्टअप इंडिया

प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 15 अगस्त 2015 को की थी। इस स्कीम के तहत न सिर्फ युवा उद्यमी तैयार हो रहे हैं बल्कि वे युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं। इसके लिए 10 हजार करोड़ का कोष स्थापित किया गया है। इसके तहत 3 साल तक टैक्स में छूट है और पहले 3 साल के दौरान कोई जांच नहीं होती है। भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम हैं। यहां 73.2 अरब अमेरिकी डॉलर के 21 यूनिकॉर्न हैं।

पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय श्रमेव जयते कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अक्टूबर 2014 को पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय श्रमेव जयते कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए श्रम की जरूरत है। हमने आज तक श्रम को उचित दर्जा नहीं दिया है। हमें अब श्रमिकों के प्रति नजरिया बदलना होगा। हमारा श्रमिक श्रम योगी है। मोदी ने कहा कि सत्यमेव जयते जितनी ही ताकत श्रमेव जयते में भी है।

यह क्‍यों महत्‍वपूर्ण हैं?
अनेक देशों में आर्थिक वृद्धि को गति देने और समुदायों को सशक्‍त करने के लिए परिवहन, सिंचाई, ऊर्जा और सूचना तथा संचार टैक्‍नॉलॉजी में निवेश की महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है। औद्योगीकरण के रोजगार बढ़ाने वाले प्रभाव ने समाज पर अनुकूल असर डाला क्‍योंकि मैन्‍यूफैक्चरिंग में हर एक रोजगार पर अन्‍य क्षेत्रों में 2.2 रोजगार पैदा होते हैं।

मैन्‍यूफैक्‍चरिंग क्षेत्र रोजगार देने वाला एक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र है जिसने 2009 में दुनिया भर में करीब 47करोड़ रोजगार दिया या दुनिया भर में 2.9 अरब कामगारों में से करीब 16% इस क्षेत्र में हैं। बहुत पहले से ही यह मान्‍यता रही है कि उद्योग और संचार का एक मजबूत वास्‍तविक नेटवर्क उत्‍पादकता और आय बढ़ा सकता है और स्‍वास्‍थ्‍य, खुशहाली तथा शिक्षा में सुधार ला सकता है। इसी तरह से टैक्‍नॉलॉजी की प्रगति देशों के रूप में हमारी खुशहाली बढ़ाती है और पहले से अधिक संसाधनों एवं ऊर्जा कुशलता के माध्‍यम से पृथ्‍वी की स्थिति में भी सुधार कर सकती है।