संयुक्त राष्ट्र। भारत ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में कहा कि जलवायु सुरक्षा मुद्दे से निपटना जो जलवायु परिवर्तन का सिर्फ एक पहलू है, “वांछनीय नहीं” है। इसके साथ ही भारत ने आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन के नजरिए से दुनिया के गरीब हिस्सों में टकरावों को देखना केवल “एकतरफा विमर्श” प्रस्तुत होगा।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) रीनत संधू ने यहां कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर चर्चा संबंधित तंत्रों में केंद्रित तरीके से की जा रही है। उन्होंने कहा कि चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो, जैव-विविधता हो, मरुस्थलीकरण हो या अन्य, आगे की कार्रवाई के लिए तंत्र बनाए गए हैं।

संधू ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा (जलवायु और सुरक्षा) विषय उच्च स्तरीय खुली चर्चा में कहा, ‘‘ इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, जलवायु परिवर्तन के एक पहलू को चुनना, यानी जलवायु सुरक्षा, और इससे इस मंच में निपटना, जो इस तरह की बहुआयामी समस्या से निपटने के लिए तैयार नहीं है, वांछनीय नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित मूलभूत सिद्धांतों और चलनों की अनदेखी करते हुए, सुरक्षा परिषद विमर्श में जलवायु सुरक्षा लाने से इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर समग्र चर्चा की प्रकृति बाधित हो सकती है।

उनहोंने कहा, “जब हम जलवायु को सुरक्षित बनाए जाने पर विचार-विमर्श करते हैं, तो हमें सजग रहना चाहिए कि समानांतर जलवायु मार्ग का निर्माण नहीं करें। हमें समावेशी निर्णय लेने की राह पर ही बढ़ते रहने की जरूरत है, जिस पर सदस्य देश पहले ही सहमति दे चुके हैं।’’

संधू ने इस बात पर भी बल दिया कि जलवायु परिवर्तन ने लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और टकरावों को बढ़ा दिया है लेकिन जलवायु परिवर्तन के नजरिए से दुनिया के गरीब हिस्सों में संघर्षों को देखने से केवल एकतरफा विमर्श प्रस्तुत होगा जबकि टकरावों के कारणों को कहीं और खोजा जाना है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल की रिपोर्ट का भी हवाला दिया और कहा, “जलवायु परिवर्तन टकराव को बढ़ा सकता है, लेकिन इसके लिए एक वजह के रूप में निर्धारित नहीं किया जा सकता है।”