ब्रिटेन। हाल के हफ्तों में दुनिया रिकॉर्ड तोड़ने वाली प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आयी। चीन और पश्चिम यूरोप में भयंकर बाढ़ आयी, उत्तर अमेरिका में गर्म हवाएं चली और सूखा पड़ा तथा उप आर्कटिक क्षेत्रों में जंगलों में आग लगी।

ब्रिटेन के मौसम पर एक वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि असाधारण मौसम या बेमौसम घटनाएं देश में आम हो गयी है। अगस्त 2020 में दक्षिण इंग्लैंड में लगातार छह दिन तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहा। भविष्य में ब्रिटेन में गर्मियों में नियमित तौर पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहने की आशंका है जबकि वैश्विक ताप वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहेगी।

कनाडा में जून 2021 में राष्ट्रीय तापमान का रिकॉर्ड टूट गया और लिटन, ब्रिटिश कोलंबिया में पारा 49.6 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। ब्रिटिश कोलंबिया कुछ दिनों पहले जंगल में लगी आग से तबाह हो गया।

इनमें से कई घटनाओं ने जलवायु वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। कुछ वैज्ञानिकों को यह चिंता होनी शुरू हुई कि उन्होंने यह ठीक से नहीं आंका कि जलवायु कितनी जल्दी परिवर्तित होगी।

सबकुछ चिंताजनक है :

बाढ़ और जंगल में लगी आग अलग घटनाएं नहीं हैं : ये जलवायु प्रणाली में कई अंतर संबंधों का नतीजा है। लंदन में जुलाई के मध्य में अचानक आयी बाढ़ के उदाहरण को देखिए। गर्मी में आए आंधी तूफान के कारण ऐसा हुआ जो पृथ्वी की सतह से उठती गर्म हवाओं से प्रेरित थे। इस बीच पश्चिमी अमेरिका के एक जंगल में भड़की आग लंबे समय तक सूखा पड़ने का नतीजा है।

पृथ्वी की जलवायु जटिल, गतिशील और अव्यवस्थित है जिसमें भूमि, समुद्र और वायुमंडल के बीच संपर्क और ऊर्जा प्रवाह शामिल है। लेकिन इन सभी जटिलताओं को समझना हमेशा संभव नहीं है इसलिए वैज्ञानिकों को उन्हें रेखीय प्रणालियों और मॉडलों में फिट करने के लिए प्रबंधनीय टुकड़ों में तोड़ना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप हम प्रत्येक हानिकारक प्राकृतिक आपदा को दूसरे से अलग समझते हैं। बाढ़ आने में बारिश और जंगल में आग लगने में चिंगारी के अलावा कई अन्य तत्व भी जिम्मेदार होते हैं। हमारी जलवायु प्रणाली के सभी तत्व किसी न किसी तरीके से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

हमारी जलवायु के गर्म होना जारी होने के कारण उसका आधार बदल रहा है। इसके कारण मौसमी परिस्थितियां भी तेजी से बदल रही हैं जिससे असाधारण मौसम या बेमौसमी घटनाओं को परिभाषित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

असाधारण मौसमी घटनाओं के बीच अंतर संबंधों को हाल फिलहाल तक विज्ञान समुदाय ने काफी अनदेखी की। लेकिन अब इन जटिल संबंधों की पहचान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान बढ़ रहा है।

(क्रिस्टोफर जे व्हाइट, यूनिवर्सिटी ऑफ स्ट्रैथक्लाइड में जल, पर्यावरण, निरंतरता और जन स्वास्थ्य के प्रमुख)