मणिपुर के तामेंगलोंग संतरा, मैंडरिन परिवार की एक प्रजाति है जो मणिपुर राज्य में पाई जाने वाली एक अनोखी फल फसल है इसके साथ ही एक विशेष किस्म की हाथी मिर्च ने भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग हासिल कर लिया है।

शुक्रवार को एक ट्वीट में इसकी पुष्टि करते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री नोंगथोम्बम बीरेन सिंह ने लिखा, “मणिपुर के लिए दिन की कितनी शानदार शुरुआत है! मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मणिपुर के 2 (दो) उत्पादों जैसे हाथी चिली और तामेंगलोंग ऑरेंज को जीआई टैग दिया गया है।

उन्होंने कहा, “यह मणिपुर के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है जिससे किसानों की आय में अत्यधिक वृद्धि होगी।”

एक भौगोलिक संकेत (जीआई) एक संकेत है जो उन उत्पादों पर उपयोग किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और इसमें उस क्षेत्र की विशेषताओं के गुण और प्रतिष्ठा भी पायीं जाती हैं।

मणिपुर ऑर्गेनिक मिशन एजेंसी (मोमा) ने 2019 में तामेंगलोंग नारंगी और सिराराखोंग हाथेई मिर्च के लिए जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। मोमा के परियोजना निदेशक के देबदत्त शर्मा ने कहा कि जीआई प्रमाण पत्र शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

तामेंगलोंग संतरा एक अनूठी फल फसल है जो ज्यादातर तामेंगलोंग जिले में पाई जाती है जो राज्य के वार्षिक उत्पादन में 50% से अधिक का योगदान करती है। यह विशेष रूप से अपनी अच्छी तरह से मिश्रित मिठास और अम्लीय स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।

दूसरी ओर एक विशिष्ट स्वाद और रंग के साथ मिर्च की सबसे अच्छी किस्मों में से एक,  हाथेई मिर्च उखरुल जिले के सिराराखोंग गांव में उगाई जाती है।

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से मणिपुर हर दिसंबर में ऑरेंज फेस्टिवल और हर अगस्त में सिराराखोंग हाथेई उत्सव मनाकर इन दोनों उत्पादों का प्रचार कर रहा है।

मणिपुर काला चावल, सुगंधित चिपचिपा चावल, जिसकी खेती सदियों से राज्य में की जाती रही है और इसकी विशेष सुगंध की विशेषता है, मई 2020 में जीआई टैग प्राप्त हुआ। इससे पहले कचई नींबू, एक अनूठी किस्म की नींबू जो उखरुल जिले के कचई गांव में उगती है उसको भी जीआई पंजीकरण टैग भी प्रदान किया गया।