दुनियाभर में वायु प्रदूषण की समस्‍या एक विकराल रूप में सबके सामने है। दुनिया के करीब 91 फीसद आबादी ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर है, जो उसके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद हानिकारक है। शहरों की हालत बहुत ही नाज़ुक स्थिति में बनी हुई है। भारत में तो स्थिति बहुत ही ख़राब है जहाँ प्रदूषण की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे वहां की स्थिति का अंदाज़ा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। वायु प्रदूषण के साथ साथ शहरों में जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण आदि सभी की स्थिति दयनीय है लेकिन वायु प्रदूषण की समस्या अभी चरम पर है। वायु प्रदूषण हर विकासशील और विकसित देशों में देखने को मिल रहा है। आज के वक्त में यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है। वहीं ऐसे प्रदूषण को रोकने के लिए भी ढेरों कदम उठाये जाते हैं ताकि आने नयी पीढ़ी को हम एक अच्छा वातावरण दे सकें जिसमें वह स्वच्छ पानी और जल उनको मिल सके इसीलिये हर साल 2 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। ताकि लोगों में प्रकृति और प्राकृतिक चीज़ों के संरक्षण के बारे में जागरूक कर सकें।

प्रदूषण नियंत्रण दिवस के बारे में…
1984 की भोपाल गैस त्रासदी के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को याद करने के लिए राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस प्रतिवर्ष 2 दिसंबर को मनाया जाता है। यह वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी दिन है। भोपाल गैस त्रासदी ने दिखाया कि प्रदूषण और पर्यावरण में जहरीली गैसों की उपस्थिति खतरनाक हो सकती है। इसलिए, यह दिन न केवल उन लोगों के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने घातक त्रासदी में अपनी जान गंवाई, बल्कि प्रबंधन और नियंत्रण पर जागरूकता फैलाने के लिए भी मनाया। औद्योगिक आपदाएँ, औद्योगिक प्रक्रियाओं या मानवीय लापरवाही से उत्पन्न प्रदूषण को रोकना।

यह दिन लोगों और उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के महत्व को समझने के लिए मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य वायु, मिट्टी, शोर और जल प्रदूषण जैसे प्राकृतिक संसाधनों की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाना भी है।

प्रदूषण नियंत्रण दिवस का महत्व

भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 70 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण मर जाते हैं। यह भी कहता है कि वायु प्रदूषण की स्थिति इतनी खराब है कि विश्व स्तर पर दस में से नौ लोगों के पास सुरक्षित या सुरक्षित पहुंच नहीं है। शुद्ध हवा, खासकर बच्चे और बड़े लोग वायु प्रदूषण से अत्यधिक प्रभावित होते हैं।

हवा में मौजूद प्रदूषक श्लेष्म झिल्ली और अन्य सुरक्षात्मक बाधाओं से गुजर सकते हैं और फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इतना ही नहीं वायु प्रदूषण ओजोन परत के नुकसान के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के लिए भी जिम्मेदार है।

प्रदूषण को कैसे करें नियंत्रित

1. भीड़-भाड़ वाले इलाके में कचरा न जलाएं क्योंकि धुएं से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। अक्षय ऊर्जा और पुनर्चक्रण योग्य उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देना।

2. शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण को कम करने के लिए शहरी जंगलों और हरी छतों को चुनकर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।

3. बिजली, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी से बचें।

4. नदियों या जलाशयों में कचरा या कचरा न डालें।