केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शनिवार को कहा कि देश के 180 जिलों में पिछले सात दिनों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। महामारी के हालात पर चर्चा के लिए हुई मंत्री समूह की 25वीं बैठक को ऑनलाइन संबोधित करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि कोविड-19 के मरीजों में से 1.34 फीसदी आईसीयू में भर्ती हैं, 0.39 फीसदी वेंटिलेटर पर हैं जबकि 3.70 फीसदी मरीज ऑक्सीजन सहायता पर हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ” 180 जिलों में पिछले सात दिनों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। इसी तरह, 18 जिलों में पिछले 14 दिनों में, 54 जिलों में 21 दिनों में और 32 जिलों में पिछले 28 दिनों में संक्रमण का कोई नया मामला दर्ज नहीं किया गया है।” उन्होंने कहा कि देशभर में कोविड-19 के 4,88,861 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं जबकि 1,70,841 मरीज वेंटिलेंटर पर हैं और 9,02,291 मरीज ऑक्सीजन सहायता पर हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर, नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग राज्य मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बैठक में हिस्सा लिया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

हर्षवर्धन ने मंत्री समूह को सूचित किया कि देशभर में शनिवार तक कोविड-19 टीके की 16.73 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं, जिसमें शुक्रवार को दी गईं 23 लाख से अधिक खुराकें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ” राज्यों को अब तक टीके की कुल 17,49,57,770 खुराकें दी जा चुकी हैं, जिनमें से 16,65,49,583 का उपयोग हो चुका है जबकि 84,08,187 खुराकें अभी भी राज्यों के पास उपलब्ध हैं। कुल 53,25,000 खुराकों की आपूर्ति की जानी है और इन्हें जल्द ही राज्यों को पहुंचाया जाएगा।”

भारत में की जा रही जांचों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि देश की क्षमता प्रतिदिन 25,00,000 नमूनों की जांच करने की हो गई है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक कुल 30,60,18,044 नमूनों की जांच की जा चुकी है जिसमें पिछले 24 घंटे के दौरान हुई 18,08,344 जांच शामिल हैं।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक डॉ सुजीत कुमार सिंह ने देश के कोविड प्रक्षेपवक्र पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने टियर-2,3 श्रेणी के क्षेत्रों में संक्रमण के मामले बढ़ने की सूरत में अस्पताल के बुनियादी ढांचा विकास और जांच में बढ़ोतरी की आवश्यकता एवं महत्व पर जोर दिया।