अगर हम मौसमी फल और सब्जियों को अपने रोजाना डाइट में लें और जंक फूड की खपत को कम करें, तो इससे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के शून्य भुखमरी लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिल सकती है.

हर साल 16 अक्टूबर को  विश्व खाद्य दिवस  मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने साल 1945 में इसकी स्थापान की थी. जिसका मुख्य उद्देश्य था दुनिया से भुखमरी खत्म करना. हर साल की तरह इस बार भी एक दम अलग ही थीम है. इस साल की थीम है- ‘हमारे कार्य, हमारा भविष्य, जीरो हंगर के लिए हेल्दी डायट्स’. गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार हमें ये बात नहीं समझ आती है कि आखिर अपनी डाइट में क्या चीज लें जिससे हमेशा हेल्दी रहें.

एफएओ के रिपोर्ट अनुसार पूरी दुनिया की बात करें तो 820 मिलियन से अधिक लोग दुनिया भर के नौ लोगों में एक व्यक्ति भूखा रहता है और कुपोषण हर तीन लोगों में से एक को प्रभावित करता है. मनुष्य के अधिक मोटे होने का कारण फाइबर युक्त व्यंजन और उच्च कैलोरी कैलोरी वाले आहार जैसे रिफाइंड स्टार्च, चीनी, वसा, नमक, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से समृद्ध और अक्सर मांस के अत्यधिक सेवन करने से होता है. 30,000  से अधिक खाद्य पौधों की प्रजातियों को मानव के खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है. जिनमें से केवल 200 की खेती खेत-स्तर पर की जाती है. बुकलेट में कहा गया है कि खेत के स्तर पर मौसमी खेती, देशी फसलों को पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए खेती की जानी चाहिए. दिन के अंत में 50 फीसदी मनुष्यों की कैलोरी का सेवन सिर्फ आठ प्रमुख फसलों जैसे गेहूं, मक्का, चावल, जौ, सेम, मूंगफली, मक्का, आलू और शर्बत से होता है.

घर का खाना बेहतर- कई लोग ऐसे होते है जो बिजी लाइफस्टाइल के कारण घर पर खाना तैयार नहीं कर पाते हैं. जिसके कारण वह स्ट्रीट फूड, वेंडर या फिर सुपर मार्केट से लेकर कुछ भी खा लेते हैं. इस अनहेल्दी खाने का असर आप पर और आपके बच्चों पर पड़ता है. कई रिसर्च के अनुसार मोटापा और न खाने की बीमारी युवाओं में सबसे ज्यादा इसी कारण हो रही है. इसलिए अपने दिमाग में थोड़ा सा जोर डालें और सोचे कि थोड़ा वक्त निकाल कर घर पर बनाया हुआ खाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है.

व्हाइट फूड्स की जगह ब्राउन- व्हाइट फूड्स जैसे कि चीनी, ब्रेड या चावल. इनकी जगह आप ब्राउन फूड्स लेना शुरू करे. इसमें अधिक मात्रा में न्यूट्रिशंस पाया जाता है.

एफएसएसएआई ने कहा है कि खाद्य उत्पादों में जनवरी 2021 से तीन प्रतिशत से अधिक उद्योग निर्मित ट्रांस-वसा नहीं होना चाहिए. 2022  तक एफएसएसएआई ट्रांस-वसा के स्तर को दो प्रतिशत तक लाने की योजना बना रहा है.

एक अन्य कारक जो खाद्य असुरक्षा से लड़ने में मदद कर सकता है, वह है भोजन की कम बर्बादी.

एफएओ द्वारा 14 अक्टूबर, 2019 को प्रकाशित स्टेट ऑफ एग्रीकल्चर रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्तर पर  दुनिया का लगभग 14 प्रतिशत भोजन फसल कटने के बाद खो जाता है. फसल के बाद विभिन्न स्तरों पर फलों, सब्जियों और पशु-आधारित उत्पादों के अपव्यय के कारण कुल सूक्ष्म पोषक तत्वों का लगभग 60 प्रतिशत नष्ट हो जाता है. यदि अधिक बुनियादी ढाँचा और नई तकनीकें प्रदान करके इन नुकसानों से बचा जा सकता है, तो 60 प्रतिशत सूक्ष्म पोषक हानि को बचाया जा सकेगा.

विश्व खाद्य दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या बोला-

विश्व खाद्य दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने कहा कि देश जीरो हंगर की तरफ बढ़ रहा है. 2030 तक देश जीरो हंगर श्रेणी में आ जाएगा, तब देश में एक भी व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा. सरकार इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है.

केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और किसान भाइयों का बड़ा योगदान है. 2017-18 में चौथे अग्रिम आकलन के अनुसार खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 के मुकाबले लगभग 20 मिलियन टन ज्यादा रहा है.
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से आर्या परियोजना और फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इस अवसर पर उन्होंने एग्री स्टार्ट अप और उद्यमिता कांक्लेव का उद्घाटन किया.