दुनियाभर में लुप्त हो रही वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की प्रजातियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस यानी वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे मनाया जाता है। इस खास दिवस पर दुनियाभर की सरकारें वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई तरह के जागरूकता अभियान आयोजित करती हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा हर साल अलग-अलग थीम से इस खास दिवस को मनाता है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस खास दिवस के मौके पर ट्वीट कर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों की सराहना की।

वहीं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार चीता के प्रजनन पर काम कर रही है, जो 1952 में विलुप्त हो गया था। मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘भारत वन्यजीव और जैव विविधता संपन्न देश है। देश में ग्लोबल टाइगर और एशियाई शेर की 70 फीसदी आबादी है। जबकि तेंदुए की भारत में 60 फीसदी आबादी है। नरेंद्र मोदी सरकार चीता के प्रजनन पर काम कर रही है, जो 1952 में विलुप्त हो गए थे। इस बड़ी बिल्ली (चीता ) की प्रजाती बड़ी संख्या में जल्द ही देखने को मिलेगी’।

विश्व वन्यजीव दिवस का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता, सहयोग और समन्वय स्थापित करना है। यह दिवस हमें वन्यजीव अपराध, जो व्यापक है, आर्थिक, पर्यावरण और सामाजिक प्रभावों के खिलाफ तत्काल कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 68वें अधिवेशन में 3 मार्च को प्रतिवर्ष विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय 20 दिसंबर 2013 को लिया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने CITES सचिवालय से इस दिवस के क्रियान्वयन संबंधी व्यवस्थाएं देखने का आग्रह किया था। वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आयोजित सम्मेलन (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, CITES Convention, 1973) में कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (कोप) की 16वीं बैठक (बैंकाक, 2013) में थाईलैंड ने 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने संबंधी एक प्रस्ताव रखा था।