कोरोना के दौर में जहां कई लोगों की जान चली गई वहीं, कई लोगों की रोजी रोटी चली गई। समाज के वंचित, पीड़ित, असहाय लोगों की मदद के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट राष्ट्रव्यापी हेल्पलाइन शुरू करने जा रहा है। सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट के संस्थापक व अध्यक्ष अटल बिहारी बजाज ने बताया कि इस हेल्पलाइन नंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के दिन लॉन्च किया जाएगा। यह एक टोल फ्री नंबर होगा जो आने वाले 15 दिनों में प्राप्त हो जाएगा और इस नंबर को दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के दिन लॉन्च किया जाएगा। मौजूदा समय में भी लोग संस्था के नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। संस्था के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले बुद्धिजीवी सदस्य लोगों की मदद करेंगे। फिर चाहे लोगों को कानूनी मदद उपलब्ध करानी हो या फिर रोजगार परक ट्रेनिंग देनी हो, संस्था की लीगल सेल जरुरतमंद लोगों की मदद करेगी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष अटल बिहारी बजाज बताते हैं कि आज के दौर में मानवाधिकार के हनन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार, प्रशासन सहित तमाम ऐसी संस्थाऐं लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए हैं, लेकिन उन्हें आम लोगों की दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं है। देश में मानवाधिकार लोगों की हैसियत देखकर मिलता है जबकि संविधान में निहित अधिकार सभी के लिए एक समान है। संविधान के सामने कोई छोटा बड़ा, अमीर गरीब नहीं। लेकिन यह सब किताबी बातें लगती हैं क्योंकि आज भी कई लोगों को अपने अधिकारों का ही जानकारी नहीं है। शिक्षित समाज भी मानवाधिकार का हनन करने में पीछे नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनके अधिकारों के बारे में न केवल जानकारी पहुंचाना चाहता है, बल्कि उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव मदद करने को तैयार है।

अटल बिहारी बजाज ने बताया कि कोरोना महामारी ने कई लोगों की जिंदगियां लील ली हैं। पीछे कई समस्याओं को छोड़ दिया जिसमें आजीविका कमाने की चिंता भी शामिल है। संस्था उन लोगों को ट्रेनिंग देने जा रही है जिनके परिवार में कमाने वालों की मौत हो गई। ऐसे महिलाओं को उनके स्किल के हिसाब से वोकेशनल ट्रेनिंग देने की शुरुआत करने जा रही है। रोजगार परक कोर्स जैसे सिलाई, कढ़ाई, टाइपिंग, पैकिंग, प्रबंधन जैसे कई काम की ट्रेनिंग उपलब्ध करा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेगी संस्था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट के महिला विंग की अध्यक्ष चंद्र प्रभा भाटिया ने बताया कि पिछले एक सालों में कोरोना के कारण देश में कई समस्याएं आई हैं। हमारी संस्था जरुरतमंद महिलाओं और बच्चों की हमेशा मदद करती रही हैं। कोरोना काल में भी कई महिलाओं की मदद की। संस्था ने 20 राज्यों में करीब 1000 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं की जानकारी न होने के कारण लोग उनका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे में सरकारी कोशिशें भी बेकार हो जाती है। संस्था समाज के ऐसे वंचित, असहाय लोगों व महिलाओं की मदद के लिए हमेशा तत्पर है।
वे बताती हैं कि केन्द्र सरकार ने कोरोना से पीड़ित लोगों के लिए कई योजनाएं शुरू की है। लेकिन वे योजनाएं धरातल तक नहीं पहुंच पा रही है। यह भी मानवाधिकार का मामला बनता है। पिछले एक साल में ऐसी कई महिलाएं संपर्क में आईं जिनकी मदद की गई। सबसे खास बात यह है कि कई महिलाओं को तो योजनाओं का पता ही नहीं है। इसलिए मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट लोगों को जागरूक करेगी।

संस्था का उद्देश्य-

राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट एक ग़ैर-राजनैजिक राष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना 6 जुलाई 2021 को की गयी। राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट देश के संविधान में सच्ची अखंडता और विश्वास रखती है। मानवाधिकार, बाल अधिकार, महिला अधिकार सहित सभी अधिकार, जो संविधान में वर्णित हैं, उनमें लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद में विश्वास शामिल हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट का विश्वास एक ऐसी व्यवस्था में है, जिसमें आम जनता अपने अधिकारों के साथ शिक्षा, शांति और समृद्धि का प्रचार-प्रसार कर सके। इसलिए इस जनजागरण मुहिम की शुरुआत की गई है। इसमें देश के 20 राज्यों से कई बुद्धिजीवी लोग जुड़े हैं और इस संबंध में लोगों के बीच जागरुकता लाने का सार्थक प्रयास कर रहे हैं। संस्था हमेशा मानती है कि कोई भी सार्थक पहल लोगों के सहयोग के बिना नहीं सफल हो सकती।

देश में मानवाधिकार कानूनों की रक्षा करने के लिए कई एजेंसियां स्थापित हैं लेकिन कानूनी लड़ाइयों व व्यवस्था में व्याप्त कमियों के कारण जरुरतमंद लोगों को अपने हक की लड़ाई लड़ने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई लोग तो बिना लड़े ही लचर व्यवस्था के आगे हथियार डाल देते हैँ। राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट उन लोगों के साथ खड़ी है। उन्हें न्याय दिलाने व लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करने की यह शुरुआत है। सफर बहुत लंबा है, जबतक सभी लोगों को उनके अधिकारों व जरुरतमंद लोगों को न्याय नहीं मिल जाता तब तक यह सफर जारी रहेगा।