प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ रघुनाथ अनंत माशेलकर ने एमिटी यूनिवर्सिटी गुरूग्राम द्वारा आयोजित एमिटी वेबिनार में भारत के भविष्य के बारे में अपनी बात रखी और कहा की कोरोना महामारी के पहले भारत ने आर्थिक विकास की जो गति पकड़ी थी उसे इस महामारी के बाद भी देश को वही गति बना कर रखनी चाहिए। डॉ माशेलकर ने आर्थिक सुधार के लिए तीन चीज़ो पर बल दिया – Decentralization, Decarburization, और Discipline और कहा की देश को इन पर अपना ध्यान केंद्र्ति करना चाहिए।

डॉ माशेलकर ने ‘रीन्वेंटिंग एंड री-इमेजिनिंग ऑन द पोस्ट कोविड -19 वर्ल्ड” विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह सामान्य ज्ञान है कि COVID 19 युग के बाद का जीवन पहले जैसा नहीं होगा। महामारी के प्रभाव का स्थायी प्रभाव होने की उम्मीद है। COVID-19 महामारी के विनाशकारी प्रभाव ने असमानता को तेजी से बढ़ाया है, जिसके कारण केवल 3 महीनों में इसने 49 मिलियन लोगों को गरीबी से अत्यधिक गरीबी की श्रेणी में डाल दिया है और उनकी आजीविका को बुरी तरह से बाधित कर दिया है। नए आर्थिक मॉडल के लिए तीन Rs – Restart, Rebuild और Recover की बहुत आवश्यकता है।

डॉ माशेलकर ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि अब हमें अपने आप को जीवन के एक नए तरीके से जीना सीखना चाहिए जिसमें सामाजिक दूरी भी शामिल है। यह देश भर में Hybrid workforce models (संकर कार्यबल) के लिए एक नया सामान्य बन जाएगा, जो ज्यादातर उद्योगों और कॉरपोरेट्स के लिए है जो घर से तीन दिन और कार्यालय में दो दिन की शारीरिक उपस्थिति के आधार पर हो सकता है। डॉ माशेलकर ने आगे ये भी कहा कि आत्मसंयम, आत्म-अनुशासन और आत्मविश्वास, कोरोना महामारी संकट से उबरने के लिये बेहद जरुरी है।

भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर के लिए किए गए संकल्प की प्रशंसा करते हुए भारत डॉ माशेलकर ने कहा, आत्मनिर्भरता को अलगाव के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ एकीकरण का इसमे समावेश होना चाहिए”। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को विकसित करने के लिए 5 स्तंभों की बात की, जिनमें Buy, Make, Make to Buy Better, Buy to Make Better और अंतिम Make it together शामिल है। उन्होंने 1990 के उदाहरण का हवाला दिया जब भारत को अपने अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए सुपरकंप्यूटर से वंचित कर दिया गया था, लेकिन कुछ ही समय में भारत ने अपना सुपर कंप्यूटर PARAM विकसित किया। भारत के वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीविद के पास संकट में चुनौतियों का सामना करने की क्षमता है और वे अपने वैज्ञानिक परिणामों से संबंधित दुनिया की कल्पना को पार कर सकते हैं।

डॉ माशेलकर ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का विचार सही भावना से लिया जाना चाहिए। भारत इसे करने में सक्षम है; यह करने योग्य है और किया जाना चाहिए। उन्होंने तीन Ts अर्थात् Talent, Technology and Trust पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कोरोना महामारी के बाद दुनिया को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हाशिए पर रहने वाले लोग अधिक हाशिए पर न जाएं। प्रौद्योगिकी उन्नति का मुख्य उद्देश्य रोजगार पैदा करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के गांवों में रहने वाली 80% से अधिक आबादी के लिए आजीविका उपलब्ध भी होनी चाहिए।

डॉ माशेलकर ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा आयोजित उच्च शिक्षा कॉन्क्लेव में हाल की भागीदारी को भी याद किया। उन्होनें बताया की वहा पर उन्होंने अपने विचार साझा किए कि कैसे डिजिटल परिवर्तन, गुणवत्ता और पहुंच दोनों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के कई अवसर प्रदान कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल हायर एजुकेशन कॉन्क्लेव में उभरे अन्य विचारों के बीच इस बात पर भी विचार किया गया कि 17 एसडीजी से परे हमें अब 18 वें एसडीजी की आवश्यकता पडेगी।

इस वेबिनार में डॉ माशेलकर ने उन भारतीय छात्रों पर चिंता जताई, जो पीजी और पीएचडी के लिए विदेश जाने के इच्छुक थे, लेकिन महामारी के कारण अपने विश्वविद्यालयों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। डॉ माशेलकर ने आगे कहा की अब समय आ गया है भारत को देखने का और ऐसे छात्रों को भारत में भी अब उच्च शिक्षा सुलभ है। गौरतलब है कि डॉ माशेलकर ने अपनी पुरी पढाई भारत मे ही की थी जिसमे उनका पीएचडी भी शामिल था।

जब उनको ये पुछा गया की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस गरीबों को कैसे लाभान्वित कर सकता है, तब उन्होनें उत्तर दिया कि एआई और डेटा साइंस, आत्मनिर्भर भारत की अधिक मजबूत योजना को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने इस बात की आशा जताई कि वर्तमान में हम युवा भारत की नई चीजों के खोज प्रतिभा द्वारा संचालित ग्रामीण उद्यमिता की एक नई लहर पैदा करने के अवसर की कगार पर हैं।