विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आज से ठीक एक साल पहले कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया था। इससे पहले संगठन हफ्तों तक ‘महामारी’ शब्द के इस्तेमाल से बचता रहा और कहता रहा कि बेहद संक्रामक वायरस को फैलने से रोका जा सकता था।

मगर साल भर बीतने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही है और देशों को अपनी राष्ट्रवादी प्रवृत्ति छोड़ने और उन देशों को टीके की आपूर्ति करने के लिए समझा रही है जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

कोविड-19 को लेकर डब्ल्यूएचओ ने सबसे पहले चेतावनी 30 जनवरी 2020 को दी थी और कोरोना वायरस को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया था।

इसके छह हफ्ते बाद 11 मार्च को डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने कोविड-19 को ‘महामारी’ घोषित किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वायरस अंटार्कटिका को छोड़ दुनिया के सभी महाद्वीपों में पहुंच चुका था।

संगठन ने इस दौरान कई गलत कदम भी उठाए और महीनों तक लोगों को मास्क लगाने के खिलाफ सलाह दी तथा यह भी कहा कि कोविड-19 हवा से नहीं फैलता है।

जॉन होपकिन्स विश्वविद्यालय के मुताबिक, कोरोना वायरस के दुनियाभर में 11.8 करोड़ मामले हो चुके हैं और 26 लाख लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका में संक्रमण के 2.9 करोड़ मामले हैं और 5.29 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।