संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में पता चला है कि दुनियाभर के 15.5 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें दो वक्त का खाना तक नसीब नहीं हो रहा है, इनमें से 133,000 लोग वो हैं, जो भूख के कारण मौत के काफी नजदीक हैं। संयुक्त राष्ट्र की 55 देशों पर 2020 में तैयार की गई एक रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस साल भी स्थिति ठीक नहीं है और पहले से भी ज्यादा गंभीर हालात हो सकते हैं।

रिपोर्ट से विश्व के खराब हालात की भी जानकारी होती है। 2019 की तुलना में 2020 में दो करोड़ नए लोग भुखमरी की कतार में शामिल हुए हैं। इनमें से दो तिहाई लोगों की संख्या दस देशों में है। इनमें कांगो, यमन, अफगानिस्तान, सीरिया, सूडान, उत्तरी नाइजीरिया, इथोपिया, दक्षिण सूडान, जिंबाबे और हैती हैं। बुर्किना फासो, दक्षिणी सूडान और यमन में एक लाख 33 हजार वो लोग हैं, जो भूख, अभाव और मौत के बीच जिंदगी को ढो रहे हैं।

307 पेज की संयुक्त राष्ट्र की फूड क्राइसिस पर रिपोर्ट के बारे में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या खाद्य असुरक्षा में जी रहे लोगों की है। ऐसे लोगों को तत्काल पौष्टिक आहार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21 वीं शताब्दी में भुखमरी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। व‌र्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) के मुख्य आर्थिक विशेषज्ञ आरिफ हुसैन ने बताया कि पिछले साल की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध क्षेत्र की जनता में भुखमरी की स्थिति को देखते हुए ऐसे संघर्षों को रोकने के प्रयास किए जाने चाहिए।

जब तक इन संघर्षों का राजनीतिक समाधान नहीं ढूंढा जाता, तब तक जिन लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, उनकी संख्या बढ़ती जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते साल 17 देशों के 40.5 करोड़ लोगों ने गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना किया है क्योंकि महामारी के कारण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

इसके साथ ही 2008 के आर्थिक संकट के मुकाबले महामारी में चार गुना अधिक नौकरी गई हैं, जिसके कारण लोगों की आय कम हुई है। यूएन के खाद्य और कृषि संगठन के निदेशक डॉमिनिक बर्जन ने कहा कि 15.5 करोड़ में से 60 से 80 फीसदी लोग कृषि पर निर्भर हैं लेकिन बीते साल केवल 30 फीसदी को ही सहायता दी गई थी।