आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के द्वारा जल जीवन मिशन-शहरी के अंतर्गत एक पायलट पेयजल सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया। पायलट सर्वक्षण की जानकारी देते हुए मिश्रा ने बताया कि शहरों में उचित जल वितरण, तथा अपशिष्ट जल के पुनःउपयोग का पता लगाने और एक चुनौती प्रक्रिया के माध्यम से जल की मात्रा और गुणवत्ता के संबंध में जल निकायों की मैपिंग करने के लिए पेयजल सर्वेक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले कदम के रूप में मंत्रालय ने दस शहरों-आगरा, बदलापुर, भुवनेश्वर, चूरू, कोच्चि, मदुरै, पटियाला, रोहतक, सूरत और तुमकुर- में पायलट आधार पर पेयजल सर्वेक्षण लॉन्च करने का निर्णय लिया है।

पायलट सर्वेक्षण के निष्कर्ष के आधार पर सर्वेक्षण का विस्तार सभी अमृत शहरों में किया जाएगा। नागरिकों तथा पालिका अधिकारियों के साथआमने-सामने के साक्षात्कारों के माध्यम से पेयजल, अपशिष्ट जल प्रबंधन, गैर राजस्व जल तथा तीन जल निकायों की स्थिति पर डाटा एकत्र किए जाएंगे। यह सर्वेक्षण स्वीकृत प्रश्नावली और ऑन कॉल इंटरव्यू, जल नमूना संग्रह तथा प्रयोगशाला परीक्षण के आधार और गैर-राजस्व जल के लिए फील्ड सर्वे के आधार पर किया जाएगा।

मिशन की निगरानी टेक्नोलॉजी आधारित प्लेटफार्म के माध्यम से की जाएगी। इस प्लेटफॉर्म से प्रगति तथा परिणाम के आधार पर लाभार्थी की निगरानी की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए सरकार की ओर से धन पोषण तीन चरणों 20:40:40 में किया जाएगा। तीसरी किस्त उपलब्ध कामकाजी परिणाम के आधार पर जारी की जाएगी तथा धन पोषण करते समय विश्वसनीय अपवर्जन का उपयोग किया जाएगा।

इसका मूल उद्देश्य क्या हैं ?
जल जीवन मिशन (शहरी) का उद्देश्य एसडीजी लक्ष्य-6 के अनुसार 4,378 वैधानिक शहरों में सभी परिवारों को नल के पानी की सप्लाई करना है। इसका उद्देश्य 500 अमृत शहरों में सीवर प्रबंधन करना है ताकि इन शहरों को जल सुरक्षित बनाया जा सके। 500 अमृत शहरों में शहरी परिवारों में नल का पेयजल उपलब्ध कराने में 2.68 करोड़ का अंतर है और सीवर कनेक्शन देने में 2.6 करोड़ का अंतर है। जल जीवन मिशन (शहरी) में इस अंतर को पाटने का प्रस्ताव है।

ताजा जल आपूर्ति की व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए जल निकायों को नया जीवन देना और हरित स्थान बनाना तथा शहरों को जल सोख लेने लायक बनाना आवश्यक है ताकि बाढ़ की संभावना कम की जा सके तथा शहरी जलीय प्रबंधन योजना के माध्यम से सुविधा बढ़ाई जा सके। जल जीवन मिशन (शहरी) के अंतर्गत प्रत्येक शहर के लिए शहर जल संतुलन योजना विकसित करके जल अर्थव्यवस्था को चक्रीय बनाना है। इसके लिए फोकससाफ किए गए सीवर जल को रिसाइकल, पुनःउपयोग, जल निकायों के पुनर्जीवन और जल संरक्षण पर है।

संस्थागत व्यवस्था विकसित होने से जल की 20 प्रतिशत मांग दोबारा उपयोग किए गए जल से की जाएगी। जल के क्षेत्र में नवीनतम वैश्विक टेक्नोलॉजी का लाभ उठाने के लिए टेक्नोलॉजी उपमिशन का प्रस्ताव किया गया है। जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा तथा संचार अभियान का प्रस्ताव है।

मिशन के कार्यक्रम में सुधार भी शामिल है। इन सुधार कार्यक्रमों में शहर का पीने योग्य पानी का सूचकांक तैयार करना, गैर-राजस्व जल में कटौती, पालिका वित्त सुधार, वर्षा जल संचयन, 2025 तक कम से कम 20 प्रतिशत जल की मांग रिसाइकिल जल से करना तथा प्रति शहरी स्थानीय निकाय में तीन जल निकायों को पुनर्जीवित करना है। इन सुधारों को सफल बनाने के लिए शहरी स्थानीय निकायों को संवेदी बनाया जाएगा।

जल जीवन मिशन (शहरी) के लिए कुल प्रस्तावित लागत 2,87,000 करोड़ रुपए है। इसमें अमृत मिशन को निरंतर वित्तीय समर्थन के लिए 10,000 करोड़ रुपए शामिल हैं। सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों से अपने कुल परियोजना धन आवंटन के 10 प्रतिशत मूल्य तक की पीपीपी परियोजनाएं प्रारंभ करने को कहा गया है।

पूर्वोत्तर तथा पर्वतीय राज्यों के परियोजनाओं के लिए केंद्रीय धन पोषण 90 प्रतिशत होगा। संघ शासित क्षेत्रों के लिए धन पोषण 100 प्रतिशत, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए केंद्रीय धन पोषण 50 प्रतिशत, एक से 10 लाख की आबादी वाले शहरों के लिए केंद्रीय धन पोषण एक-तिहाई तथा 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों के लिए केंद्रीय धन पोषण 25 प्रतिशत होगा।