लोकसभा में सोमवार को नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता विधेयक 2021 पेश किया गया जिसके माध्यम से समुद्री नौवहन के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी संबंधी बदलाव को ध्यान में रखते हुए पोत यातायात सेवाओं के लिये नया ढांचा तैयार करने एवं उनका प्रबंधन सुगम बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

लोकसभा में पोत परिवहन मंत्री मनसुख मंडाविया ने विधेयक को पेश किया।विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि समय-समय पर सामुद्रिक क्षेत्र में बहुत परिवर्तन हुए हैं और नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का काफी विकास हुआ है। इसमें जलयान यातायात सेवा और नौचालन सहायता का विविधीकरण शामिल है जिसके अंतर्गत प्रकाश स्तम्भ और प्रकाश पोतों से भिन्न तकनीकी सहायता शामिल है।

इसमें कहा गया है कि नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता की भूमिका ‘रेडियो और डिजिटल’ आधारित हो गई है। ऐसे में सरकार और उक्त अधिनियम की धारा 3 के तहत नियुक्त महानिदेशक की भूमिका व्यापक हो गई है।

इसके तहत नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता पद का प्रकाश स्तम्भ के स्थान पर उपयोग करने का प्रावधान किया गया है ताकि कानूनी रूप से नौचालन के संबंध में समुद्री सहायता के लिये आधुनिक विधियों का और बेहतर उपयोग किया जा सके ।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि वर्तमान विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद सरकार प्रकाश स्तम्भ अधिनियम 1927 को निरस्त करेगी।