सरकार ने मंगलवार को कहा कि आगामी 22 मार्च से पूरे देश में एक बार फिर जलशक्ति अभियान शुरू किया जा रहा है जो देश के सभी 700 जिलों में चलेगा। जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा के जवाब में राज्यसभा में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि जल शक्ति अभियान के पहले चरण का ऐलान 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से किया था और 25 दिसंबर को सुशासन दिवस पर इस योजना की शुरुआत हुई थी। ’’ शेखावत के अनुसार, आगामी 22 मार्च से पूरे देश में एक बार फिर से जलशक्ति अभियान शुरू किया जा रहा है जो देश के सभी 700 जिलों में चलेगा।

उन्होंने कहा ‘‘ 25 दिसंबर 2019 को जल शक्ति अभियान का पहला चरण शुरू हुआ। 25 मार्च 2020 को कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन लगाया गया। इसके बावजूद हमारी ओर से एक दिन भी बर्बाद नहीं जाने दिया गया। हमने वेबिनार के जरिये तैयारी जारी रखी और इसके फलस्वरूप करीब 15 माह में ही तीन करोड़ 85 लाख घरों में हम नल के माध्यम से पानी पहुंचा रहे हैं जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय यह आंकड़ा तीन करोड़ 23 लाख घरों का था।’’

उन्होंने कहा कि अब 85 हजार गांवों में महिलाओं को पानी लेने के लिए घरों से बाहर नहीं जाना पड़ता, यह एक बड़ी उपलब्धि है। शेखावत ने कहा कि अब पीने के पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए, इस बारे में जागरुकता फैलाने की खातिर देश के प्रत्येक जिले में, हर ब्लॉक में इसकी गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना बनाई है।

उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में पानी से जुड़े अलग अलग मंत्रालय थे और उनके काम सबको पता हैं। ‘‘लेकिन मोदी सरकार ने ऐसे सभी मंत्रालयों को मिला कर जल शक्ति मंत्रालय बनाया और जल की चुनौती से निपटने का बीड़ा उठाते हुए जल के आंदोलन को जन जन का आंदोलन बनाने की प्रक्रिया शुरु की।’’

उन्होंने कहा ‘‘पंचायत व्यवस्था के करीब ढाई लाख प्रतिनिधियों को पत्र लिख कर सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर जल ग्राम सभा आयोजित करने और जल को बचाने और उसके संरक्षण पर चर्चा करने का अनुरोध किया गया। दो लाख से अधिक पंचायतों में यह काम हुआ।’’

शेखावत ने कहा कि इसके बाद जल शक्ति अभियान शुरु हुआ जिसके तहत देश के 256 जिले चिह्नित कर वहां अधिकारियों को भेजा गया। इस कार्य में वनीकरण, परंपरागत जल स्रोतों का पुनरुद्धार, जल संरक्षण, जल संचयन जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ‘‘इस कार्य की सफलता को देख कर विभिन्न दलों के सांसदों ने इस अभियान के तहत अपने अपने जिलों को चुने जाने का अनुरोध किया था।’’उन्होंने कहा कि अब 22 मार्च से यह अभियान देश के 700 जिलों में शुरू होने जा रहा है।