दार्शनिक थेल्स ने सैकड़ों वर्ष ईसा पूर्व कहा था कि जल ही समस्त भौतिक वस्तुओं का कारण और समस्त प्राणी जीवन का आधार है लेकिन अब लोग इस बात को महत्व नहीं दे रहे हैं। अफसोस के साथ कहना होगा कि भारत समेत पूरी दुनिया तब से अब तक इस अमूल्य धरोहर को सहेजने में विफल रही है। इसी वजह से हर साल विश्व जल दिवस मनाया जाता है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जलशक्ति अभियान: कैच द रेन का शुभारम्भ किया। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री और उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच केन- बेतवा सम्पर्क परियोजना के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए । नदियों को आपस में जोड़ने की राष्ट्रव्यापी योजना की यह पहली परियोजना है।

 

जल शक्ति अभियान:कैच द रेन के बारे में

यह अभियान देश भर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक साथ “कैच द रेनः “जहां भी, जब भी संभव हो वर्षा का जल संग्रह करें” शीर्षक के साथ चलाया जाएगा। इस अभियान को मानसूनी वर्षा की शुरुआत से पहले और मानसूनी वर्षा के मौसम की समाप्ति के बीच 30 मार्च, 2021 से 30 नवम्बर, 2021 की अवधि में कार्यान्वित किया जाएगा।

जमीनी स्तर पर जल संरक्षण में जन भागीदारी के लिए इस अभियान को जन आन्दोलन के रूप में शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य वर्षाजल के समुचित संग्रह को सुनिश्चित करने के लिए सभी सम्बंधित हितधारकों को सक्रिय करना है ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों के मौसम और भूगर्भीय संरचना के हिसाब से वर्षा जल संरक्षण के लिए आवश्यक निर्माण कार्य कर सकें ।

इस कार्यक्रम के बाद जल और जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार करने के लिए जहां चुनाव हो रहे हैं, उन राज्यों के अलावा देश के सभी जिलों की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगाI जल संरक्षण के लिए ग्राम सभाएं ‘जल शपथ’ भी लेंगी।

केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन के बारे में

यह समझौता अंतर्राज्यीय सहयोग के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस सपने को पूरा करने की शुरुआत करेगा जिसके तहत नदियों में आने वाले अतिरिक्त जल को सूखा पीड़ित एवं जल की कमी वाले क्षेत्रों में विभिन्न नदियों को आपस में जोड़कर पहुंचाया जा सकेगा।

इस परियोजना में दाऊधन बाँध बनाकर केन और बेतवा नदी को नहर के जरिये जोड़ना, लोअर ओर्र परियोजना, कोठा बैराज और बीना संकुल बहुउद्देश्यीय परियोजना के माध्यम से केन नदी के पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है। इस परियोजना से प्रति वर्ष 10.62 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएं, लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति और 103 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन होगा ।

यह परियोजना बुन्देलखंड क्षेत्र में पानी की भयंकर कमी से प्रभावित क्षेत्रों के लिए अत्यधिक लाभकारी होगी जिसमें मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले तथा उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिले शामिल हैं । इससे भविष्य में नदियों को आपस में जोड़ने की और अधिक परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी की कमी के कारण देश के विकास में बाधा न बन पाए। इस अवसर पर केन्द्रीय जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने विश्व जल दिवस  का लोगों को शुभकामनाएं दिये।

विश्व जल दिवस की शुरुआत
दुनिया को पानी की जरूरत से अवगत कराने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की थी. साल 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण तथा विकास के नजरिए से संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED) में विश्व जल दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी, जिसका आयोजन पहली बार साल 1993 में 22 मार्च को हुआ था।

विश्व जल दिवस क्यों मनाया जाता है?
विश्व जल दिवस को हर साल एक थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल की थीम- वेल्यूइंग वॉटर है, जिसका लक्ष्य लोगों को पानी का महत्व समझाना है। दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिल पाता और फिर लोग गंदा पानी पीकर कई सारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं. ऐसे में पानी के मूल्य को समझना बहुत ही जरूरी है।

पानी पीने का क्या फायदा होता है? 
पानी के जरिए हमारे शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही पानी शरीर से खराब तत्वों को बाहर निकालने में भी अहम भूमिका निभाता है। दरअसल, हमारे शरीर का तापमान नियमित करने से लेकर त्वचा को मुलायम रखने तक, पानी बहुत सारे काम करता है। इसलिए यह जरूरी है कि शरीर में पानी की जरूरी मात्रा हमेशा बनी रहे, इसकी कमी न हो।