CINTAA विवाद: उपासना सिंह और नगमा मोरारजी का जीत का दावा, कलाकारों के फंड में गड़बड़ी के लगाए आरोप

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मनोरंजन Updated On :

मुंबई। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) में नेतृत्व और प्रशासन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एसोसिएशन की अध्यक्ष उपासना सिंह और कोषाध्यक्ष नगमा मोरारजी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कानूनी लड़ाई में जीत का दावा किया। उन्होंने पूर्व कार्यकारिणी पर कलाकारों के कल्याण के लिए निर्धारित धन का उचित इस्तेमाल नहीं करने, बिना अनुमति फैसले लेने और अदालत के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए।

उपासना सिंह ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी पद के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता और कलाकारों के हितों के लिए है। उन्होंने कहा, “अगर हम सच्चे हैं, तो हमें जीतना चाहिए और हम जीत चुके हैं।” उपासना के मुताबिक, अब तक डिंडोशी कोर्ट और हाई कोर्ट में कानूनी कार्यवाही उनके पक्ष में रही है। उन्होंने देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनकी लड़ाई कलाकारों के अधिकारों के लिए जारी रहेगी।

कलाकारों के कल्याण पर खर्च को लेकर सवाल

उपासना सिंह ने आरोप लगाया कि पिछली कार्यकारिणी ने कलाकारों की कई बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। इनमें लंबे समय तक काम करना, भुगतान में देरी और आने-जाने के खर्च के लिए भत्ता नहीं मिलना शामिल है।

उन्होंने एसोसिएशन के संविधान का हवाला देते हुए दावा किया कि CINTAA को मिलने वाले धन का 20 प्रतिशत हिस्सा कलाकारों के कल्याण पर खर्च किया जाना चाहिए, लेकिन इस प्रावधान का पालन नहीं हुआ।

उपासना के अनुसार, एसोसिएशन को नए सदस्यों की फीस, सालाना सदस्यता शुल्क, किराये से होने वाली आय और सावधि जमा पर मिलने वाले ब्याज से पैसा मिलता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे कई कलाकार घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस और बीमार माता-पिता के इलाज तक के लिए मदद मांगते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कलाकारों की सहायता के बजाय एसोसिएशन का पैसा प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य गैर-जरूरी खर्चों पर लगाया गया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने वाले सदस्यों को कारण बताओ नोटिस, निलंबन और सदस्यता रद्द होने का डर दिखाया जाता था।

कार्यकारिणी में बदलाव को लेकर भी विवाद

उपासना सिंह ने आरोप लगाया कि कार्यकारिणी के 50 प्रतिशत से अधिक सदस्यों के इस्तीफे के बाद समिति संवैधानिक रूप से भंग हो गई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं कभी इस्तीफा नहीं दिया, इसके बावजूद अगले ही दिन पदों में मनमाने बदलाव किए गए और पद्मिनी कोल्हापुरे को महासचिव घोषित कर दिया गया।

उनके अनुसार, वरिष्ठ कलाकार प्रीति सप्रू और हेमंत पांडे सहित कुछ सदस्यों को भी फैसलों से असहमति जताने पर कारण बताओ नोटिस दिए गए थे।

नगमा मोरारजी ने फंड और दस्तावेजों पर उठाए सवाल

CINTAA की कोषाध्यक्ष नगमा मोरारजी ने कहा कि एसोसिएशन की संपत्ति, धन और दस्तावेज किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि संस्था और उसके कलाकारों के हैं। उन्होंने बताया कि वह 36 वर्षों से एसोसिएशन की सदस्य हैं और फिल्म तथा टेलीविजन जगत के 10,000 से अधिक सदस्य इससे जुड़े हैं।

नगमा ने आरोप लगाया कि 7 अगस्त को कार्यकारिणी के आधे से अधिक सदस्यों के इस्तीफे के बाद समिति भंग हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग अवैध रूप से समिति चलाते रहे। उन्होंने अनधिकृत बैंक खाते खोलने और आधिकारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर के आरोप भी लगाए।

उन्होंने दावा किया कि अदालत के निर्देश के बावजूद विरोधी गुट ने 20 अक्टूबर को अलग से चुनाव कराए और 21 अक्टूबर को नतीजे घोषित कर दिए। नगमा के अनुसार, अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर निर्देश दिया था कि परिणाम 26 तारीख से पहले घोषित नहीं किए जाएं और तब तक निर्वाचित निकाय आधिकारिक कामकाज न संभाले।

नगमा ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत के आदेश वाले दिन ही CINTAA कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज टेम्पो में भरकर दूसरी जगह ले जाए गए। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक में कलाकारों की सावधि जमा राशि समय से पहले भुनाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये सभी आरोप विवाद के एक पक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने का दावा

नगमा मोरारजी ने कहा कि अदालत के निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालत ने 26 अक्टूबर तक इंतजार करने का निर्देश दिया था, तो उससे पहले चुनाव कराने और नतीजे घोषित करने की जल्दबाजी क्यों की गई।

उन्होंने कहा कि इस कानूनी विवाद में खर्च होने वाला पैसा उन कलाकारों की मेहनत की कमाई है, जिन्होंने 1958 से इस संस्था को खड़ा किया और इसकी रक्षा की है।

पद्मिनी कोल्हापुरे बनीं कार्यकारिणी चुनाव की विजेता

इस विवाद के बीच CINTAA की कार्यकारिणी के चुनाव 20 अक्टूबर को संपन्न हुए। घोषित नतीजों के अनुसार, पद्मिनी कोल्हापुरे 604 वोट हासिल कर पहले स्थान पर रहीं, जबकि पूनम ढिल्लों 601 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।

चुनाव में अन्य प्रमुख उम्मीदवारों को मिले वोट इस प्रकार रहे:

  • राकेश बेदी – 575 वोट
  • कंवरजीत पेंटल – 548 वोट
  • चंद्रप्रकाश ठाकुर – 514 वोट
  • अभय भार्गव – 439 वोट
  • घनश्याम श्रीवास्तव – 395 वोट
  • जया भट्टाचार्य – 392 वोट
  • टीना घई – 374 वोट
  • रजित कपूर – 340 वोट
  • शीबा आकाशदीप – 322 वोट
  • रमेश गोयल – 296 वोट
  • जितेंद्र सिंह – 284 वोट
  • मोहम्मद फारूक बंधुकिया – 272 वोट
  • रोहित रॉय – 268 वोट

चुनाव में अनिल कपूर और राकेश बेदी समेत कई कलाकारों ने मतदान किया। नेतृत्व, चुनाव प्रक्रिया, वित्तीय पारदर्शिता और आधिकारिक दस्तावेजों को लेकर जारी विवाद ने फिल्म और टेलीविजन जगत के इस प्रमुख संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



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