नई दिल्ली। अन्नदाताओं और सरकार के बीच नए कृषि कानूनों को लेकर चल रही खींचतान ख़त्म होती नहीं दिख रही है। अब तक सरकार और किसानों के बीच पांच दौर की वार्ता विफल हो चुकी है और कयास लगाए जा रहे थे कि शायद छठे दौर की बातचीत में इस टकराव के बीच से कोई सीधा और सटीक रास्ता निकल सके।
बुधवार सुबह से ही छठे दौर की सरकार और किसानों की वार्ता पर संदेह के बादल मंडरा रहे थे और आखिरकार ये वार्ता भी रद्द हो गई। केंद्र सरकार ने प्रदर्शन कर रहीं 40 किसान यूनियनों के नेताओं के साथ बुधवार को होने वाली छठे दौर की महत्वपूर्ण वार्ता रद्द कर दी।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कुछ किसान नेताओं के बीच मंगलवार रात हुई बातचीत के विफल रहने के बाद किसानों ने सरकार के साथ वार्ता करने से इनकार कर दिया था। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक, किसान यूनियन के नेताओं के साथ आज की वार्ता रद्द कर दी गई है।
सरकार की ओर से अभी तक तीनों कृषि कानूनों के कुछ प्रावधानों में महत्वपूर्ण संशोधन के सबंध में लिखित प्रस्ताव किसान यूनियन को भेजने की औपचारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। मंगलवार को केन्द्रीय गृह मंत्री की अखिल भारतीय किसान सभा के हन्नान मोल्ला और भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत सहित किसान यूनियन नेताओं के एक समूह के साथ हुई बैठक में भी कोई हल नहीं निकल पाया था।
बैठक में, शाह ने लिखित रूप में तीन कृषि कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन की पेशकश की थी, लेकिन कुछ किसान नेताओं ने कहा था कि वे बुधवार को प्रस्तावित बैठक में शामिल नहीं होंगे। इन नेताओं ने कहा था कि सरकार के लिखित प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद ही अगले कदम पर निर्णय किया जाएगा।
किसानों और सरकार के बीच अभी तक पांच बार बैठक हो चुकी है, लेकिन मामले का कोई हल नहीं निकल पाया है। प्रदर्शन कर रहे किसान काननू में संशोधन के सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए, इन्हें वापस लिए जाने की मांग पर अडिग हैं।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी।