लखनऊ। लखनऊ के केजीएमयू में शनिवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता सैयद सिब्ते रजी का निधन हो गया। उनकी मृत्यु हृदय गति रुकने से हुई। सैयद सिब्ते रजी झारखंड व असम के राज्यपाल रह चुके हैं। गंभीर हालत में शुक्रवार को उन्हें केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती किया गया था। वह करीब 83 वर्ष के थे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
7 मार्च 1939 को रायबरेली में जन्में सैयद सिब्ते रजी पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के खास माने जाते थे। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम किया था। 1969 में वह युवा कांग्रेस में आए और 70 के दशक में उन्हें युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। 1980 में कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वह 1980-84 तक यूपी कांग्रेस कमेटी के महासचिव भी रहे। इंदिरा गांधी की मौत के बाद भी गांधी परिवार से उनकी नजदीकी बनी रही। कांग्रेस ने उन्हें दूसरी बार 1988 में राज्यसभा भेजा और उनका यह कार्यकाल 1992 में समाप्त हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद उन्हें कांग्रेस ने तीसरी बार राज्यसभा भेजा। 2004 में उनके राजनीतिक अनुभव को झारखंड का राज्यपाल बनाकर सम्मान दिया गया। 2009 में करीब चार महीनों के लिए वह असम के भी राज्यपाल रहे। गांधी परिवार की इस खास राजनीतिक शख्सियत ने राजीव गांधी 78वीं जयंती पर ही अंतिम सांस ली।
सैयद सिब्ते रजी के संबंधों का संसार बहुत बड़ा था। संगीतकार नौशाद उनके करीबी दोस्त थे, जिनका इस्तेमाल वे अपने परिवार के सभी समारोहों में करते थे। उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन कराया और दिल्ली में प्रैक्टिस करना शुरू किया। वर्ष 1982 में उन्होंने स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ संयुक्त राष्ट्र में भाग लिया। वह 1985 में शिक्षा मंत्री भी थे।
सैय्यद सिब्ते रजी ने मार्च 2005 में झारखंड के राज्यपाल की हैसियत से एनडीए के सदस्यों की संख्या को नजरअंदाज कर झारखंड मुक्ति मोर्चा के शिबू सोरेन को सरकार बनाने का न्योता दे दिया। यह फैसला उस समय की राजनीति में विवाद का बड़ा कारण बना। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के हस्तक्षेप से सिब्जे रजी का फैसला पलटा गया और एनडीए की ही सरकार बनी।
उधर, उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति के अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य मोहसिन रजा ने केजीएमयू पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर और प्रवक्ता सचिन रावत ने भी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
