उत्तराखंड: रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बावजूद घर-जमीन से बेदखल किया जा रहा है

नागरिक न्यूज नागरिक न्यूज
उत्तराखंड Updated On :

नैनीताल जिले के रामनगर तहसील में बसे पूछड़ी गांव में पिछले वर्ष वन अधिकार कानून 2006 के अन्तर्गत ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति का गठन हो चुका है। कानून कहता है कि इस समिति के गठन होने के बाद, भूमि पर अधिकार की प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले किसी को भी उसके घर और जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता है।

पूछड़ी क्षेत्र में 39 लोगों को इसी भूमि पर हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ है। जिनको बेदखल किया जा रहा है, उनलोगों की भूमि भी इसी प्रकृति के होने के कारण कानूनन उनको नहीं हटाया जा सकता है। 1966 में पूछड़ी क्षेत्र को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था। किसी भी क्षेत्र को आरक्षित वन क्षेत्र बनाने की वन अधिनियम 1927 में एक प्रक्रिया है जिसके तहत एक बंदोबस्त अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। सूचना के अधिकार में जब बंदोबस्त अधिकारी की रिपोर्ट मांगी गई तो वन विभाग ने राज्य सूचना आयोग में स्टांप पर लिखकर दिया कि हमारे पास इसके दस्तावेज नहीं है।

इसके बावजूद भी पूछड़ी गांव में चारों तरफ से बैरिकेडिंग कर इसे जीरो जोन घोषित कर दिया है यहां पर किसी को भी और मीडिया को भी आने की इजाजत नहीं है। जन संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत 29 लोगों शांति भंग का आरोपित बताकर उप जिलाधिकारी द्वारा नोटिस दिए गए हैं तथा दर्जनों लोगों को हिरासत में ले लिया गया है।

सुबह 5:00 से ही भाजपा सरकार का नंगा नाच शुरू हो चुका है जिन लोगों को हाईकोर्ट से स्टे मिले हुए हैं वन व जिला प्रशासन ने उनकी भूमि को भी छीन लिया गया है। जिन लोगों को वन विभाग द्वारा जबाब देने के लिए नोटिस दिए गए हैं, उनको भी हटाया जा रहा है।

ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति की अध्यक्ष धना तिवारी व सदस्य सीमा तिवारी ने वन प्रशासन को जब बताया कि उन्हें कोर्ट से स्टे मिला हुआ है तो उन्हें तथा उनके परिवार को मारा पीटा गया तथा उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। वे अब कहां है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

भाजपा सरकार और उसके मातहत तराई पश्चिमी वन विभाग तथा नैनीताल का जिला प्रशासन पूर्णतया बेलगाम हो चुका है। वह ना तो माननीय उच्च व सर्वोच्च न्यायालय और ना ही देश के किसी भी कानून का अनुपालन कर रहा है। स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि समाजवादी लोकमंच के संयोजक मुनीष कुमार द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी करने पर पुलिस उनके कार्यालय पहुंच गई और उन पर प्रेस नोट वापस लेने का दबाव बनाने लगी।

उत्तराखंड और देश के सभी प्रबुद्ध जनपक्षीय नागरिकों एवं संगठनों से हमारी अपील है कि भाजपा सरकार और उसके मातहत वन और प्रशासनिक महकमे द्वारा किए जा रहे कानून के उल्लंघन के खिलाफ एकजुट होकर सरकार और प्रशासन पर कानून के अनुपालन का दबाव बनाएं। उत्तराखंड में अतिक्रमण के नाम पर जिस तरह लाखों लाख लोगों को उजाड़ा जा रहा है इस नीति पर रोक लगाने के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है। जो व्यक्ति जहां पर निवास और कारोबार कर रहा है उसे उस भूमि पर मालिकाना हक दिया जाए और यदि किसी को हटाना भी है तो पहले उसका पुनर्वास किया जाए इन मांगों को लेकर हम सब को एकजुट होने की जरूरत है।

(मुनीष कुमार, संयोजक, समाजवादी लोक मंच)