दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक बड़े ऑनलाइन ठगी मामले में तीन आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध अब समाज के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है, जो लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह टिप्पणी अनिक जैन, अमरदीप शर्मा और अरिहंत जैन की अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए की।
यह मामला CBI द्वारा दर्ज किया गया है, जिसमें तीनों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी के गंभीर आरोप हैं। इसके साथ ही उनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराएं भी लगाई गई हैं। इस केस की सुनवाई स्पेशल जज राजेश मलिक की कोर्ट में हुई।
अदालत ने कहा कि जब आरोप सीधे साइबर अपराध से जुड़े हों, तो ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होता। जज ने यह भी कहा कि अभी जांच शुरुआती दौर में है और यह भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि कितने लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं। आगे की जांच में आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जरूरत भी पड़ सकती है। इसलिए इस समय उन्हें राहत देना गलत होगा।
राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल अर्जी के मुताबिक एक निजी कंपनी M/s Lord Mahavir Services India Private Limited ने साल 2024-25 के दौरान वोडाफोन आइडिया से 7,721 सिम कार्ड हासिल किए थे। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल आम लोगों को ठगने के लिए किया गया। आरोप है कि कॉल करने वाले खुद को TRAI, पुलिस या दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और उनसे पैसे ऐंठते थे।
CBI ने कोर्ट को बताया कि सिम कार्ड लेने के लिए कंपनी ने फर्जी दस्तावेज और अंतिम उपयोगकर्ताओं की झूठी सूची दी थी। कई सिम ऐसे लोगों के नाम पर जारी कराए गए जो कंपनी के कर्मचारी भी नहीं थे। इससे साफ होता है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से ठगी करने के लिए बनाया गया था।
मामले की गंभीरता और अब तक सामने आए सबूतों को देखते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट ने तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। यह फैसला साइबर अपराध के बढ़ते मामलों में कड़े रुख अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोर्ट की टिप्पणी ऐसे अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करती है और यह संदेश देती है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
