बिहार में मंगलवार (13 जनवरी) सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई है। बिहार में वरिष्ठ विधायक, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति और उपसभापति अब दो-दो सरकारी बंगला रख सकेंगे। कैबिनेट में इस फैसले पर मुहर लग गई है।
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ विधायकों को विधानमंडल पूल के अलावा केंद्रीय पूल से भी बंगला आवंटित होगा। मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, विधान परिषद सभापति एवं उपसभापति को केंद्रीय पूल के अलावा विधानमंडल पूल से भी बंगला मिलेगा। दूसरे बंगले के लिए 17 सौ रुपया प्रति महीना किराया देना होगा जो बेहद सस्ता है। सरकार का तर्क है कि कई मंत्री ऐसे होते हैं जो विधायक भी होते हैं और उनके विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के लिए विधायक आवास का उपयोग जरूरी होता है।
जानकारी के अनुसार, अब तक मंत्री बनने के बाद विधायक आवास खाली करना अनिवार्य होता था। वहीं वैसे वरिष्ठ विधायक जो मंत्री नहीं बने उनको खुश करने के लिहाज से यह निर्णय माना जा रहा है। इस फैसले पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। राजद प्रवक्ता एज्या यादव ने इस फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नीतीश कभी सोशल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे, लेकिन अब मदारियों के हाथों नाच रहे हैं। BJP जो चाहती है मुख्यमंत्री से करवा रही है। जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने BJP बोलती हैं नीतीश कर देते हैं। बस रबर स्टैम्प बनके रह गये हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता आसित नाथ तिवारी ने कहा कि तीन साढ़े तीन लाख जिन आवासों का किराया है। सिर्फ 17 सौ रुपया प्रति महीने के हिसाब से नेताओं को दिया जा रहा है। यही नीतीश का समाजवाद है। गरीबों को घर देने के बजाए सत्तापक्ष नेताओं का रेवाड़ी बांटी जा रही है।
BJP प्रवक्ता कुंतल कृष्ण गोल मोल जवाब देते हुए कहा कि कई ऐसे माननीय हैं जो कई बार विधायक बने हैं। पूर्व मंत्री हैं और समितियों के सदस्य हैं। ऐसे माननीय को अपने व्यवहारिक कारणों से बड़े जगहों की आवश्यकता है। उनको अलग से भी बंगला दिया जा रहा, लेकिन किराया लिया जाएगा। जनता के हित के लिए निर्णय है।
बता दें बिहार में सरकारी बंगलों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर मंत्रियों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों को आवास आवंटन को लेकर सियासी घमासान होता रहा है।
