धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला कमाल मौला मस्जिद से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में एक बार फिर न्यायिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले की अहम सुनवाई अब 18 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में होगी। जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई 98 दिन की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट खोली जाएगी। इससे पहले यह सुनवाई 16 फरवरी को इंदौर खंडपीठ में प्रस्तावित थी, लेकिन अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था।
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से इस ऐतिहासिक स्थल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कई अहम तथ्यों के सामने आने की संभावना है। जिससे यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
अब यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सर्राफ की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। यह प्रकरण रजिस्टर्ड वाद क्रमांक WP 10497/2022 के अंतर्गत विचाराधीन है, जिसे हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर किया गया है। उच्चतम न्यायालय के 22 जनवरी 2026 के आदेश और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 16 फरवरी 2026 के निर्देशों के अनुपालन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, यानी एएसआई द्वारा तैयार की गई 98 दिनों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को खोला जाना है। यह रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक की जाएगी और दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी।
माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर विवादित इमारत के वास्तविक स्वरूप और उससे जुड़े धार्मिक पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय हो सकती है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने जानकारी दी है कि अब अगली सुनवाई जबलपुर उच्च न्यायालय में होगी। वही मुस्लिम पक्षकार अब्दुल समद का कहना हैं कि 16 फरवरी को हमने न्यायालय से मांग की थी कि जबलपुर न्यायालय में हमारी पेंडिंग पिटिशन के साथ ही इस पिटिशन को भी जबलपुर में सुना जाए उसी मांग के तहत अब जबलपुर न्यायालय में आगे की सुनवाई होगी।
इस अहम सुनवाई को लेकर हिंदू और मुस्लिम समाज सहित पूरे प्रदेश की निगाहें न्यायालय पर टिकी हुई हैं। 18 फरवरी की तारीख को इस मामले में आने वाला घटनाक्रम आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
