पहली नजर में बात चाय के प्याले में तूफान जैसी थी। लेकिन जरा गहराई से देखें तो एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के जिक्र पर उठा बवाल हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की…
‘आप सुनिए मेरी बात। नैतिकता, आदर्श, सिद्धांत ये सब अपने घर-समाज के नियम हैं। विदेश नीति इनसे नहीं चलती है। वहां हर कोई अपना राष्ट्रीय हित साधने आता है। हमें भी यही करना…
अब तक हम भारत गणराज्य के स्वधर्म के 3 सूत्रों की व्याख्या कर चुके हैं। अंतिम कड़ी में यहां हम चौथे सूत्र यानी संघवाद की चर्चा करेंगे, जिसे फैडरलिज्म कहा जाता है। संविधान के पहले अनुच्छेद…
गणराज्य के स्वधर्म की शिनाख्त करती हुई इस श्रृंखला में हम आज हम तीसरे सूत्र यानी लोकतंत्र की चर्चा करेंगे। सेकुलरवाद और समाजवाद की तरह लोकतंत्र के बारे में भी यही मान्यता है…
भारत गणराज्य के स्वधर्म की इस शृंखला के पहले लेख में हमने सर्वधर्मसमभाव यानी सेकुलरवाद की चर्चा की थी। अब हम स्वधर्म के दूसरे सूत्र यानी समता या समाजवाद की चर्चा करेंगे। समता…
इन पंक्तियों का लेखक पिछले कुछ समय से बार-बार यह आगाह करता रहा है कि चाहे मोदी सरकार कुछ भी कहे, ट्रम्प इसमें कामयाब होंगे कि वह भारत सरकार को ट्रेड डील पर मजबूर…
भारत गणराज्य की स्थापना छिहत्तर वर्ष पहले हुई थी, लेकिन उसके स्वधर्म की बुनियाद कोई तीन हज़ार साल पहले पड़ चुकी थी। आज का भारत गणराज्य “भारतवर्ष”, “हिन्दुस्तान” और “इंडिया” की धाराओं का…
मैं कोई कवि नहीं हूँ। कवि सम्मेलनों का श्रोता भी नहीं। काव्य की साहित्यिक आलोचना सी मेरा दूर-दराज़ का भी रिश्ता नहीं है। बस एक पाठक हूँ, और वह भी कभी-कभार। सच कहूँ…
अगर आपको हिन्दी से प्रेम है तो कुछ ऐसा कीजिए, जिससे बच्चों को हिन्दी भाषा का चस्का लग जाए। उन्हें हिन्दी बोलने ही नहीं, पढऩे और लिखने में रस आना शुरू हो जाए। उनके लिए…
इंसान की अजीब फ़ितरत है। हम कभी भी किसी भी तरह की हकीकत के आदी हो सकते हैं। किसी भी त्रासदी और बर्बरता के साथ जीना सीख लेते हैं। उसे रोजमर्रा की आदत…
विपक्ष को ऐतराज़ है कि मनरेगा का नाम क्यों बदला जा रहा है। जिस ऐतिहासिक योजना को देश ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ के नाम से जानता रहा है, उसके नाम…
कभी कभी एक छोटी से हरकत किसी व्यक्ति के चरित्र का पर्दाफाश कर देती है। ऐसा ही चुनाव आयोग के साथ हुआ। इसी 27 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस कर देश…
बिहार चुनाव के परिणाम के बाद बहुत साथियों ने मुझसे यह सवाल पूछा – अब चुनाव लडऩे का मतलब ही क्या बचा है? अगर हर चुनाव में ले देकर भाजपा को ही जिताया…
जो तुगलकी फरमान था, वह अब शातिर तिकड़म में बदल चुका है। यानी राष्ट्रव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) का आदेश बिना सोचे-समझे लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाला एक…
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण या एसआईआर का बुनियादी झूठ पकड़ा गया है। इस झूठ का पर्दाफ़ाश उस दस्तावेज से हुआ जिसे चुनाव आयोग पिछले तीन महीनों से छुपा रहा था। यह…
हिमालय हमारे पास आया है, सोनम वांग्चुक के भेस में। उम्र है सिर्फ़ 5 करोड़ साल। हमारे लिए बुजुर्ग है, पहाड़ के लिहाज से युवा ही कहलायेगा। वो नन्हा सा बूढ़ा हमसे सवाल…
अधिकांश देशवासियों की तरह मैं भी क्रिकेट का शौकीन हूँ। तमाम दौड़-भाग और खींच-तान के बीच वक्त मिले तो देख भी लेता हूँ, चाहे कुछ ओवर ही सही। और कुछ नहीं तो फ़ोन…
चारों तरफ़ इतना अँधेरा है कि हम रौशनी के हर कतरे की तरफ़ दौड़ने लगते हैं। चाहे वो टिमटिमाता दिया हो, या जुगनू की रौशनी का भ्रम या फिर आग लगाने वाली चिंगारी-हम…
सांप मरा तो नहीं लेकिन उसका डंक निकल गया। सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के फैसले से वोटबंदी का अभियान अभी रुका तो नहीं, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बहाने लाखों-करोड़ों नागरिकों…
मेरे एक युवा दोस्त है जो फर्राटे से चीनी भाषा पढ़ते-बोलते हैं। आज सुबह मैंने उनसे एक विशेष अनुरोध किया। हमारे अखबार की हैडलाइन थी: “पीएम मोदी ने चीन में दिखाई भारत की…
वोट चोरी बहुत संगीन मसला है। यह आरोप लगाने वाले, इसका जवाब देने वाले और इसपर चर्चा करने वाले सभी को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, चूंकि यहाँ हमारे चुनावी लोकतंत्र की न्यूनतम और…
चुनाव आयोग की विशेष प्रेस कांफ्रेंस ने सिर्फ श्री ज्ञानेश कुमार गुप्ता का क़द छोटा नहीं किया। महज़ चुनाव आयोग नामक संवैधानिक संस्था की साख नहीं घटी। यह ना समझिए कि इस प्रकरण…
यूँ तो हमारे देश में शिगूफ़ों की कोई कमी नहीं रही है। लेकिन पिछले दस साल में तो जैसे शिगूफ़े खिलाना एक राष्ट्रीय व्यवसाय हो गया है। आपको कोविड का दौर याद है?…
अगर आपको देश के लोकतंत्र की चिंता है तो आपको बिहार में वोटर लिस्ट के “गहन पुनरीक्षण” (अंग्रेज़ी में एसआईआर यानी ‘सिर’) नामक सिरफिरी मुहिम पर गहन नज़र रखनी चाहिए। अगर आपको चुनाव…
वही हुआ जिसका अंदेशा था। दिल्ली से एक तुगलकी फरमान जारी हो गया। जब फरमान बिहार की ज़मीन पर पंहुचा तो रायता फ़ैल गया। उसे समेटा तो जा नहीं सकता, इसलिए अब रायता…