प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत करते हुए अपने पहले चुनावी भाषण में रोजगार के मसले की साफ अनदेखी कर दी, इस बारे में एक शब्द बोलना भी ठीक नहीं समझा जबकि इन चुनावों में विपक्षी पार्टियों ने रोजगार को चुनावी मुद्दा बना दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में लालू-राबड़ी राज के पंद्रह वर्षों के कुराज और अपने शासन काल में हुए विकास और कश्मीर की समस्या, धारा-370 के निरस्त्रीकरण जैसे मसलो में सीमित रखा। उम्मीद की जा रही थी कि प्रधानमंत्री रोजगार के मुद्दे और विकास कार्यों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे क्योंकि विपक्ष के नेता तेजस्वी अपनी हर सभा में सरकार बनते ही दस लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा करके इसे मुद्दा बना दिया है। पर मोदी के भाषण से यह मुद्दा सिरे से गायब था।
मोदी ने यह जरूर कहा कि बिहार के लोगों को रोजगार और उद्यमिता की जरूरत निश्चित रूप से है पर इसे कौन प्रदान करेगा ? क्या वे लोग इसे कर सकते हैं जो सरकारी नौकरी देने में अपनी कमाई को तरजीह देते रहे हैं। या फिर वे जो बिहार में व्यवसाय करने की सुविधा बढ़ाने और कौशल विकास का काम कर रहे हैं। मोदी ने अपनी तीन सभाओं-रोहतास, गया और भागलपुर में भी रोजगार के मसले के नजरअंदाज किया।
मोदी ने कहा कि जो लोग एनडीए के साथ नहीं हैं, इसका विरोध कर रहे हैं, वे दरअसल देश के विकास के खिलाफ हैं। उन्होंने कश्मीर के जुड़ी धारा-370 की बहाली की चर्चा करने वाले लोगों की आलोचना भी की। भाजपा की विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी बिहार में 12 चुनाव-सभाओं के संबोधित करेंगे।
छात्र नेता संतोष कुमार आर्या ने कहा कि मोदी के पास बेरोजगार नौजवानों के लिए कुछ नहीं था। यह वही मोदी हैं जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों में हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वायदा किया था। बाद में भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह ने इसे जुमला करार दिया था। संतोष ने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार के मुद्दे पर खामोश रहे जबकि उनकी पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में 19 लाख लोगों को रोजगार देने का वायदा किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषक महेन्द्र सुमन ने कहा कि सरकारी नौकरी देने में घूस लेने का उल्लेख करके उन्होंने इस मुद्दे को निपटा दिया। वैसे बिहार में बेरोजगारी लॉकडाउन के दौरान कुछ बढ गया, पर यह समस्या पहले से विकराल रही है। बेरोजगारी के मसले को जिस तरह विपक्ष उठा रहा है, उस पर कुछ कहने से विपक्ष के प्रचार को वैधता देना लगा होगा।
आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनाव सभाओं को संबोधित किया। दोनों ने रोजगार देने और पलायन रोकने में विफलता के लिए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दोषी ठहराया।
