सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अनिल अंबानी, बैंकों का बकाया कर्ज निपटाने के लिए कर दी ये डिमांड


दिग्गज कारोबारी अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom) और अन्य समूह कंपनियों से जुड़े 40000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।उन्होंने कोर्ट के सामने बैंकों का बकाया कर्ज चुकाने के लिए चरणबद्ध भुगतान योजना की पेशकश की है।साथ ही उन्होंने बैंकों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए ‘लेनदारों की एक समिति’ बनाने का भी एक प्रस्ताव दिया है।

अनिल अंबानी ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान वित्त मंत्री को लिखे एक पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें उनके मामले को संदेसरा भाइयों (स्टर्लिंग बायोटेक) की तर्ज पर सुलझाए जाने की मांग की थी।इस मामले में एक निश्चित राशि जमा करने पर स्टर्लिंग समूह के नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा सहित उनके परिवार के अन्य पांच सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी.

खुद को संदेसरा भाइयों से अलग बताते हुए अनिल अंबानी ने कोर्ट को बताया कि वह भगोड़े आर्थिक अपराधी नहीं हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं इसलिए उन्हें भी कर्ज चुकाने का बराबर का मौका मिलना चाहिए।इस बीच, अपने हलफनामे में अंबानी ने दावा किया कि वह अब तक 3.44 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान कर चुके हैं, जिसमें से 2.45 लाख करोड़ का प्रिंसिपल अमाउंट भी शामिल हैं.

नवंबर, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भगोड़े घोषित संदेसरा भाइयों के खिलाफ सभी आपराधिक मामले खत्म करने की अनुमति दी थी, बशर्ते वे कुल बकाए का एक तिहाई लगभग 5100 करोड़ रुपये का भुगतान करें।अनिल अंबानी ने भी इसी तरह के ‘स्ट्रक्चर्ड सेटलमेंट’ की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों CBI और ED को फटकार लगाई है।कोर्ट ने 40000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि संदेसरा जैसे मामलों मेंजब एजेंसियां सेटलमेंट के लिए तैयार हो गईं, फिर अंबानी के मामले में जांच इतनी धीमी क्यों है?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने का भी निर्देश दिया है।कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां इस कथित फ्रॉड की जांच समयबद्धता से और पारदर्शिता के साथ पूरा करें ताकि जनता का विश्वास बना रहे।



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