कांग्रेस के आरोपों पर बोली सरकार, लौह अयस्क पैलेट्स की निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुये सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कुद्रेमुख आयरन ओर कंपनी लिमिटेड द्वारा विनिर्मित लौह अयस्क पैलेट्स को छोड़कर अन्य लौह अयस्क पैलेट्स की निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि कुछ निजी निर्यातकों ने नियमों का उल्लंघन करते हुये 40,000 करोड़ रुपये के लौह अयस्क पैलेट्स का निर्यात किया है जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है।

वाणिज्य विभाग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि 26 सितंबर 2014 को जारी अधिसूचना के मुताबिक कुद्रेमुख आयरन ओर कंपनी लिमिटेड (KIOCL) द्वारा विनिर्मित लौह अयस्क पैलेट्स की निर्यात नीति को ‘सरकारी एजेंसी के माध्यम’ वाली सूची से संशोधित कर ‘मुक्त’ श्रेणी में किया गया। अधिसूचना में इसके साथ ही यह शर्त भी जोड़ी गई कि केआईओसीएल द्वारा विनिर्मित पैलेट्स का निर्यात केआईओसीएल, बैंगलूरू अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत इकाई द्वारा ही किया जायेगा। इसमें कहा गया, लेकिन ऐसा करते हुये उस लौह अयस्क पैलेट्स की निर्यात नीति में काई संशोधन नहीं किया गया जिसका विनिर्माण केआईओसीएल ने नहीं किया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विधि मामलों के विभाग के उप विधिक सलाहकार की राय को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अभी तक अनुमोदित नहीं किया है, इसलिये इस मामले में इसे आधिकारिक वैध राय नहीं माना जाना चाहिये। मामले में अंतिम विधायी स्थिति विचाराधीन है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिये निर्यात कानूनों में बदलाव किया है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने लौह अयस्क में 64 प्रतिशत सघनता की सीमा को हटा दिया और सार्वजनिक क्षेत्र की केआईओसीएल को चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान जैसी कंपनियों को निर्यात करने की अनुमति दे दी। खेड़ा ने इस मामले को लेकर कानून एवं न्याय मंत्रालय के 10 सितंबर को जारी एक नोट का हवाला दिया है जिसमें यह कहा गया है कि लौह अयस्क पैलेट्स के निर्यात की अनुमति केवल केआईओसीएल को दी गई है किसी अन्य कंपनी को नहीं।

First Published on: October 9, 2020 12:39 PM
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