चंद्रशेखर जन्म शताब्दी वर्ष : 17 अप्रैल को भोंडसी में भारत यात्रियों का जुटान

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नई दिल्ली। इस वर्ष 17 अप्रैल 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 99वीं जयंती है। उनका जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में हुआ था। इसी कारण इस वर्ष 17 अप्रैल 2026 से अगले वर्ष 17 अप्रैल 2027 तक उनका जन्म शताब्दी वर्ष मनाने की तैयारी की जा रही है।

चंद्रशेखर देश की राजनीति में एक अलग तरह के नेता थे। वे किसानों, मजदूरों और वंचित समाज की आवाज उठाने वाले जननायक थे। उनकी राजनीति की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से हुई। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए। आपातकाल का विरोध करते हुए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद 4-5 दलों के एकीकरण से बनी जनता पार्टी के वे अध्यक्ष बने। इसी जनता पार्टी ने 1977 में सरकार बनाई और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।

हालाँकि जनता पार्टी की सरकार अपने अंतर्विरोधों के कारण लगभग ढाई वर्ष में ही गिर गई और देश की जनता ने पुनः इंदिरा गांधी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया। इसके बाद जनता पार्टी बिखर गई। जो जनसंघ था, वह आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी में बदल गया। चरण सिंह के नेतृत्व में लोकदल अलग हो गया। अन्य दल भी अपने-अपने रास्ते चल पड़े। इसके बाद जो जनता पार्टी शेष रह गई, उसके अध्यक्ष के रूप में चंद्रशेखर बने रहे। जनता पार्टी ने कर्नाटक में सरकार बनाई, जहाँ रामकृष्ण हेगड़े मुख्यमंत्री थे। उसी दौर में, 6 जनवरी 1983 से 25 जून 1983 तक चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी से दिल्ली के राजघाट तक एक ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली, जिसने भारतीय राजनीति और जन-संपर्क का एक अलग इतिहास रचा।

इस पदयात्रा के बाद चंद्रशेखर ने हरियाणा के गुड़गांव जिले के भोंडसी में भारत यात्रा केंद्र की स्थापना की और उसे अपना प्रमुख निवास बनाया। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र में पुणे के निकट परंदवड़ी में दूसरा भारत यात्रा केंद्र स्थापित किया। वहीं 1985 में जनता पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित हुआ था और चंद्रशेखर पुनः जनता पार्टी के अध्यक्ष चुने गए थे। उन्हें चुनौती देने वाले स्वामी अग्निवेश चुनाव हार गए थे।

समय के साथ देशभर में लगभग 14 स्थानों पर भारत यात्रा केंद्र स्थापित हुए। यह चंद्रशेखर का एक गैर-दलीय, रचनात्मक और सामाजिक प्रयत्न था, जो पर्यावरण, शिक्षा, समानता, महिला सशक्तिकरण आदि पर आधारित पाँच सूत्रीय कार्यक्रम के साथ शुरू किया गया था। लेकिन समय के साथ देश की राजनीति में तेजी से बदलाव आया और 10 नवंबर 1990 को चंद्रशेखर ने देश के आठवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। बाद में, समर्थन दे रही कांग्रेस के नेताओं द्वारा लगाए गए एक बेहूदा आरोप के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वे 21 जून 1991 तक प्रधानमंत्री रहे।

राजनीति में अत्यधिक व्यस्त हो जाने के कारण भारत यात्रा केंद्रों का कार्य पीछे छूटता गया। ये केंद्र मुख्यतः वे लोग चला रहे थे, जो चंद्रशेखर के साथ पदयात्रा में शामिल रहे थे। उनमें से अनेक लोगों का सक्रिय राजनीति से कोई प्रत्यक्ष सरोकार नहीं था। उचित देखभाल और आर्थिक संसाधनों के अभाव में भारत यात्रा केंद्र उस रूप में विकसित नहीं हो सके, जैसा चंद्रशेखर ने स्वप्न देखा था। भारत यात्रा ट्रस्ट की स्थापना से जुड़े कई वरिष्ठ साथी अब इस दुनिया में नहीं हैं।

8 जुलाई 2007 को चंद्रशेखर का निधन हो गया। उनके निधन के बाद भारत यात्रा केंद्रों की जमीनों पर अनेक लोगों की नजरें टिक गईं। मुकदमे चले, विवाद हुए, और कठिन परिस्थितियाँ पैदा हुईं। ऐसे समय में भारत यात्रा ट्रस्ट के अध्यक्ष सुधीन्द्र भदौरिया ने इन केंद्रों को बचाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया। हरियाणा के अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी ये केंद्र स्थित हैं। विभिन्न प्रकार की मुकदमेबाजी और कठिनाइयों से जूझने के बाद ये केंद्र आज भी बेहतर दिनों की प्रतीक्षा में हैं।

चंद्रशेखर का राजनीतिक और सामाजिक जीवन इतना व्यापक था कि भारत यात्रा ट्रस्ट उसकी केवल एक धारा का प्रतिनिधित्व करता है। उनके जन्म शताब्दी वर्ष को तीन तरह के लोग मना रहे हैं।

पहले, वे लोग हैं, जिन्होंने चंद्रशेखर के कारण राजनीतिक लाभ और समृद्धि अर्जित की। ऐसे लोग बड़े सभागारों में भव्य आयोजन करेंगे, जहाँ तरह-तरह की कारों की कतारें और औपचारिक चमक-दमक दिखाई देगी। दूसरे, वे लोग हैं, जिनका जीवन चंद्रशेखर के कारण नया मोड़ ले सका और जो आगे चलकर किसी संस्था या संगठन के प्रमुख बने। तीसरे, वे पदयात्री हैं, जिन्होंने 1983 में उनके साथ भारत यात्रा की थी और जिन्होंने उनके विचारों, जीवन-दृष्टि और संघर्षशीलता को निकट से देखा था।

इन्हीं भारत यात्रियों का कार्यक्रम 17 अप्रैल 2026 को भोंडसी में आयोजित होगा, जहाँ देशभर से पदयात्री एकत्र होंगे। चंद्रशेखर के निधन के बाद से ही हर वर्ष 6 जनवरी और 25 जून को पदयात्री अनिवार्य रूप से कभी दिल्ली, कभी भोंडसी, कभी बेंगलुरु, तो कभी पुणे में मिलते रहे हैं और पदयात्रा की स्मृतियों को जीवित रखते आए हैं। इस बार जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर 17 अप्रैल को भोंडसी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। चंद्रशेखर जयंती के अवसर पर दिल्ली में भी अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।