केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगाः राहुल गांधी


राहुल गांधी ने आरोप लगाया, “ क्या आप लोगों को कुठपुतली याद है? कुठपुतली का शो होता था। कठपुतली की डोर कोई और खींचता था… यह मोदी सरकार नहीं है, यह अडाणी और अंबानी की सरकार है।’’


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मोगा/ रायकोट। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि केंद्र की सत्ता में उनकी पार्टी के लौटने पर नए कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के कहने पर किसानों को “बर्बाद” करने के लिए काम कर रही है।

कृषि अधिनियमों के खिलाफ ट्रैक्टर रैली की अगुवाई करते हुए कांग्रेस नेता गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोलते हुए सवाल किया कि महामारी के समय में नए कानून लाने की क्या जरूरत आन पड़ी थी?

उन्होंने कहा, “ उनका लक्ष्य एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और खाद्यान्न खरीद प्रणाली को खत्म करना है। वे जानते हैं कि जिस दिन यह हो गया, पंजाब और हरियाणा के किसान खत्म हो जाएंगे।’’

मोगा और लुधियाना जिलों से ट्रैक्टर रैली की अगुवाई करने से पहले यहां बढनी कलां में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा, “ कांग्रेस यह नहीं होने देगी। हम आपके पीछे दृढ़ता से खड़े हैं। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।’’

पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस नए कृषि कानूनों के खिलाफ चार से छह अक्टूबर के बीच समूचे राज्य में ट्रैक्टर रैलियां निकाल रही है। गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार “ एक कुठपुतली’’ की तरह काम कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया, “ क्या आप लोगों को कुठपुतली याद है? कुठपुतली का शो होता था। कठपुतली की डोर कोई और खींचता था… यह मोदी सरकार नहीं है, यह अडाणी और अंबानी की सरकार है।’’

कांग्रेस के पूर्व प्रमुख ने कहा कि अगर ये अधिनियम किसानों के लिए हैं तो वे इसके खिलाफ आंदोलन क्यों कर रहे हैं? और उन्होंने भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर कांग्रेस के विरोध का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, “ मैं गारंटी देता हूं कि जिस दिन (केंद्र में) कांग्रेस सरकार बनाएगी, इन काले कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा और रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाएग।’’

गांधी ने कहा कि व्यवस्था में सुधार और बदलाव की जरूरत है। कांग्रेस नेता ने कहा, “ मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इस व्यवस्था में कोई कमी नहीं है। व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, लेकिन इसे नष्ट करने की आवश्यकता नहीं है।’’

उन्होंने कहा, “अगर आप ऐसा करते हैं तो किसानों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं होगा और उन्हें अंबानी और अडाणी से सीधे बात करनी होगी और किसान बर्बाद हो जाएंगे।’’

गौरतलब है कि संसद ने हाल में तीन विधेयकों- कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020’, किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक 2020 और ‘आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक-2020’ को पारित किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन विधेयकों को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।

सरकार ने कहा है कि एमएसपी प्रणाली बरकरार रहेगी और उसने कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी पार्टियों पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि जो कानूनों का विरोध कर रहे हैं वे चाहते हैं कि “बिचौलिए’’ फलते फूलते रहें जबकि उनकी सरकार को किसानों के हितों की चिंता है जो अब अपनी उपज की बेहतर कीमत हासिल कर पाएंगे।

नए कानूनों पर विपक्ष के विरोध पर प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि यह सिर्फ “ विरोध के लिए विरोध है’’ और उनका दावा है कि ये पार्टियां भी इन सुधारों के पक्ष में थी लेकिन उनमें साहस की कमी है, क्योंकि उनका ध्यान सिर्फ चुनावों पर है।

गांधी ने मोदी को निशाने पर लेते हुए उन पर दो तीन बड़े कारोबारी घरानों के हितों की “सेवा’’ करने के लिए बीते छह साल से लोगों से झूठ बोलने और राष्ट्र को गुमराह करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेता ने कहा, “छह साल से नरेंद्र मोदी झूठ बोल रहे हैं। जब उन्होंने नोटबंदी की तो उन्होंने कहा था कि इससे काले धन पर अंकुश लगेगा। जब जीएसटी लागू किया गया तो इसने छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और गरीबों को प्रभावित किया।’’

गांधी ने आरोप लगाया, “ जब कोविड-19 आया तो देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घरानों का कर्ज माफ कर दिया गया । लेकिन गरीब और किसानों को कोई राहत नहीं दी गई, एक रुपया तक नहीं दिया गया।’’

गांधी ने हाथरस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि 19 वर्षीय दलित युवती के मौत के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके साथ कथित रूप से बलात्कार किया गया था।

रायकोट के जत्तापुरा में अपने संबोधन में गांधी ने कहा कि जिन सड़कों से किसान अपनी उपज मंडी लेकर जाते हैं, उन्हें ” अडाणी और अंबानी के पैसे से नहीं बनाया गया है, बल्कि सड़कों को मंडी शुल्क से हासिल किए गए पैसों से बनवाया गया है।”

उन्होंने कहा, “इन कानूनों के साथ, मंडियां खत्म हो जाएंगी और किसानों को अपना अनाज बेचने के लिए कहीं भी जाने के लिए कोई सड़क नहीं बचेगी।” कृषि कानूनों के खिलाफ रायकोट में पंचायतों द्वारा पारित प्रस्तावों को गांधी और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को सौंपा गया।

मोगा में अपने संबोधन में अमरिंदर सिंह ने भी “काले कानूनों’’ के खिलाफ लड़ाई से तब तक पीछे नहीं हटने का संकल्प लिया जबतक कि सरकार उनमें एमएसपी और एफसीआई के जारी रहने के लिए लिखित संवैधानिक गारंटी नहीं देती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नीत सरकार के मौखिक आश्वासनों पर यकीन नहीं किया जा सकता है।

सिंह ने केंद्र सरकार के हिस्से के तौर पर शिरोमणि अकाली दल पर किसानों के हितों को “ बेचने का’’ आरोप लगाया।

पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने भी सभा को संबोधित किया। उनकी मुख्यमंत्री सिंह से नहीं बनती है और पिछले साल राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद से वह कांग्रेस की गतिविधियों से दूर थे।

तीन दिन पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पंजाब मामलों के पार्टी प्रभारी हरीश रावत ने अमृतसर में सिद्धू से मुलाकात की थी, जिसके बाद पूर्व क्रिकेटर रैली में हिस्सा लेने पहुंचे।

मोगा में जनसभा को संबोधित करते हुए सिद्धू ने कृषि कानूनों को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार की आलोचना की और उन्हें “संघीय ढांचे पर हमला” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार को “पूंजीवादी” चला रहे हैं। उन्होंने कहा, ” वे हमारे अधिकार छीन रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि केंद्र ने एक ऐसी “प्रणाली” थोपी है, जो यूरोप और अमेरिका में विफल हो चुकी है।

रैली में रावत तथा पार्टी विधायक भी शामिल हुए।



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