दिल्ली में लगातार ढह रहीं इमारतें… एक साल के अंदर 6 बड़े हादसे और 35 मौतें

दिल्ली यूनिवर्सिटी में देशभर से छात्र अपना भविष्य बनाने के लिए पढ़ने आते हैं। माता-पिता उन्हें किन उम्मीदों से दिल्ली भेजते हैं, इस बात का अंदाजा भारत का हर परिवार लगा सकता है। लेकिन क्या हो जब घर से दूर गया बच्चा कभी लौटकर ही न आए? यह डरावना सपना कोई कभी देखना भी नहीं चाहता, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह तब हकीकत हो जाता है जब अचानक प्रशासन की लापरवाही और ढिलाई के चक्कर में बड़े हादसे होते हैं और कई लोगों की मौत हो जाती है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल ही में ऐसा ही हुआ। सत्य निकेतन वह संकरी गली है जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र पीजी या कमरा लेकर रहते हैं। यहां रविवार (6 अक्तूबर) को एक पीजी वाली ऐसी ही इमारत भरभराकर गिर पड़ी और छात्रों समेत कई लोग मलबे के नीचे दब गए। रविवार होने की वजह से कॉलेज बंद रहे होंगे और आशंका है कि कई बच्चे उस समय अपने पीजी में मौजूद होंगे। अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई अभी भी मलबे के नीचे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे को हादसा माना जा सकता था अगर यह पहली बार हुआ होता। जब ऐसे हादसे बार-बार होते हैं, लगातार होते हैं तो उन्हें महज ‘हादसा’ मानना सबसे बड़ी गलती होगी। इसकी जिम्मेदारी किसी को तो लेनी होगी। बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुई यह इमारत 30 साल पुरानी थी और जर्जर हो चुकी थी। इसके अगल-बगल की इमारतें भी ऐसी ही खराब हालत में हैं। इससे बड़ी बात तो यह है कि ये इमारतें अवैध रूप से बढ़ती चली गईं और बिजनेस बढ़ाने के लिए बिल्डिंग के माले भी बढ़ाए जाते रहे। इसकी इजाजत नहीं थी। सवाल उठता है कि क्या यह बात किसी को नहीं पता थी?

यह पहला हादसा नहीं था, दिल्ली में लगातार इमारत ढहने की खबरें और लोगों की जान जाने की सूचना मिलती रही हैं। इससे पहले इसी साल जुलाई में रोहिणी इलाके में चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह जाने से 3 लोगों की मौत हो गई थी जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ था। 9 जुलाई 2026 को हुए इस हादसे ने लोगों को दहलाकर रख दिया था।

इससे पहले 30 मई को साकेत/महरौली के करीब सैदुलअजाब इलाके में पांच इमारत ढहने से 6 लोगों की जान च ली गई थी। इसे भी अवैध बताया गया था।

12 जुलाई 2025 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके में 4 मंजिला पुरानी इमारत ढह जाने से 6 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी जबकि 8 व्यक्ति घायल हो गए थे।

17 मई 2025 को पहाड़गंज में एक निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट ढहने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी।

18 अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में 4 मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें 11 की जान चली गई थी।

First Published on: September 7, 2026 9:45 AM
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