जंतर-मंतर से हटीं बैरिकेडिंग, अब यहां नहीं हो सकेंगे विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर लगी बैरिकेडिंग हटा दी गई है। दिल्ली पुलिस आयुक्त के आदेश के बाद जंतर-मंतर को अधिकृत विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके साथ ही पिछले कई महीनों से इलाके में लगी आवाजाही संबंधी पाबंदियां भी समाप्त हो गई हैं।

जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक आंदोलनों और जन प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां कई बड़े विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीति पर प्रभाव डाला है। हालांकि, लगातार बैरिकेडिंग और आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी हो रही थी। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था।

दिल्ली पुलिस ने अब विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तर-पश्चिम दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले का बचाव किया। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने पत्रकार स्वाति सिंह की याचिका पर जवाब देते हुए कहा कि यह फैसला मुख्य रूप से केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों और क्षेत्र की बदली हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के एमए बेबी मामले में दिए गए आदेश के बाद नहीं लिया गया, बल्कि इस प्रस्ताव पर पुलिस और केंद्र सरकार काफी समय से विचार कर रहे थे।

गृह मंत्रालय ने 26 अगस्त को एक समिति गठित की थी, जिसे यह जांचने की जिम्मेदारी दी गई थी कि जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल बनाए रखना उचित है या नहीं। समिति ने वैकल्पिक स्थानों के रूप में रामलीला मैदान, सीबीडी ग्राउंड और बुराड़ी मैदान की सिफारिश की थी।

हलफनामे के अनुसार, जंतर-मंतर पर हर साल 1,300 से अधिक विरोध प्रदर्शन और सभाएं होती हैं, जबकि यहां एक समय में लगभग 1,500 लोगों के जुटने की क्षमता है। पुलिस ने कहा कि बड़े प्रदर्शनों के कारण यातायात, भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं, जैसे एंबुलेंस और दमकल वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। कई बार भीड़ जनपथ और कनॉट प्लेस तक फैल जाती है।

पुलिस के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य स्थानीय निवासियों, सरकारी कार्यालयों और आपातकालीन सेवाओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है।

First Published on: November 5, 2026 9:53 AM
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