उच्च न्यायालय ने अदालतों से कहा: डीआरटी, डीआरएटी के समक्ष दायर याचिकाओं पर विचार करें

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालयों से कहा कि रिक्तियों के कारण वे ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरएटी) के समक्ष दायर याचिकाओं पर विचार करें।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालयों से कहा कि रिक्तियों के कारण वे ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरएटी) के समक्ष दायर याचिकाओं पर विचार करें।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक बार न्यायाधिकरणों का गठन हो जाने के बाद मामले उच्च न्यायालयों से उनके पास वापस चले जाएंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘यह हमारे संज्ञान में लाया गया है कि डीआरटी, डीआरएटी में सदस्यों की नियुक्ति न किए जाने से संबंधित समस्याएं हैं। फिलहाल समस्या को हल करने के लिए हम उच्च न्यायालयों से उन आवेदनों पर विचार करने का अनुरोध करते हैं, जिन्हें डीआरटी, डीआरएटी के तहत दायर किया जाना है। न्यायाधिकरण के गठन के बाद, मामलों को वापस वहां लाया जा सकता है।’’

पीठ में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव भी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने कहा फिलहाल वह समिति से नियुक्तियों में तेजी लाने को कहेगी।

न्यायालय ने इससे पहले देश भर में न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों के लिए एक स्वतंत्र निकाय की जरूरत पर बल देते हुए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन की जरूरत को दोहराया था।

First Published on: December 16, 2021 4:56 PM
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