एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक खाद्य मंत्री ने मंगलवार को मोटे अनाजों की खरीद, वितरण और निपटान की नीतिगत व्यवस्था की समीक्षा की।
गोयल ने इस दौरान कहा, ‘‘देश में मोटे अनाजों की खेती और वितरण को प्रोत्साहन दिये जाने के नियमों में बदलाव लाने का समय आ गया है।’’
गोयल रेल मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के साथ साथ खाद्य मंत्रालय का भी कामकाज देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों की खेती और उनकी खरीद को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाये जाने की आवश्यकता है।
इस समीक्षा बैठक में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग और कृषि मंत्रालय के तहत आने वाले कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में देश में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की आवशयकता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी 2023 को ‘‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’’ घोषित किया है।
पिछला स्टॉक खत्म होने के बाद ही दी जा सकती है नई खरीद की अनुमति
खरीद मानक में संशोधन के तहत निर्धारित प्रविधान में कहा गया है कि पिछला स्टॉक खत्म होने के बाद ही नई खरीद की अनुमति दी जा सकेगी। जरूरत के हिसाब से मोटे अनाज को एक से दूसरे राज्यों में ले जाया जा सकता है। कम लागत से अधिक उत्पादन और किसानों की आमदनी को बढ़ाने में सहायक साबित होने वाले मोटे अनाज की खेती मुफीद साबित होगी। कुपोषण की चुनौती से पार पाने में मोटे अनाज की अहम भूमिका है। स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीद और वहीं पर उसकी खपत के प्रविधान से ढुलाई की लागत को बचाया जा सकता है। मोटे अनाज वाली कई फसलों की भंडारण मियाद तीन महीने से अधिक होती है।

नई दिल्ली। खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को मोटे अनाजों का उत्पादन और उनकी खरीद को प्रोत्साहन दिये जाने के साथ योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।