
तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर आज देश भर में किसानों, किसान संगठनों, राजनीतिक दलों और जन संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन और चक्का जाम किया। सबसे बड़ी बात यह है पूरे देश में यह चक्काजाम शांतिपूर्ण रहा।
पूरे देश की बात करें तो किसान विरोध और चक्काजाम के कई रंग रहे। दिल्ली की बात करें तो शनिवार को किसानों के तीन घंटे के राष्ट्रव्यापी ‘चक्का जाम’ के दौरान केएमपी एक्सप्रेसवे पर स्पीकरों पर बजते प्रदर्शन के देहाती गाने, ट्रकों और ट्रैक्टरों पर लगे तिरंगे और इंतजार में खड़े राहगीर नजर आए।
इस प्रदर्शन में पहुंचे एक स्थानीय किसान ने कहा, ‘‘ मैं 11 बजे यहां आया। तब महज कुछ लोग थे और कुछ ही देर में भीड़ बहुत बढ़ गई। उद्देश्य शांतिपूर्ण ढंग से वह काम करना है जो हमारे नेताओं ने हमें निर्देश दिया है- यानी तीन बजे तक सड़क जाम करनी है।’’
सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी किसानों को बिस्किट और फल वितरित किए गए। वाहन चालकों को नम्रतापूर्वक प्रदर्शन के बारे में बताया गया और उनसे लौट जाने का अनुरोध किया गया।
हरियाणा के हिसार निवासी अजीत अहलूवालिया (29) ने कहा, ‘‘ लोगों के लिए हम असुविधा पैदा नहीं करना चाहते। इसी वजह से केवल तीन घंटे के लिए आह्वान दिया गया था। सुरक्षाबल हमारा और उनका रास्ता कई दिनों से रोक रहे हैं। हम आशा करते हैं कि आम लोग महज कुछ घंटे के लिए हमारे साथ सहयोग करें। सच्चाई यह है कि वे ऐसा कर रहे हैं।’’
बीमार लोगों को लेकर जा रहे वाहनों को बिना किसी देरी के जाने दिया गया। धैर्य के साथ इंतजार कर रहे यात्रियों ने कहा कि उन्हें ‘चक्का जाम’ की जानकारी थी लेकिन सामाजिक एवं पेशेवर कार्यक्रमों के चलते उन्हें निकलना पड़ा।
निजी ठेकेदार सतनाम संधू (42) को किसी व्यापारिक बैठक में जाना था जबकि सोनू आहूजा एवं उनके परिवार के लोग अपने एक रिश्तेदार की शादी में जा रहे थे।
आहूजा ने कहा, ‘‘ हमारा परिवार भी किसान है और हम किसानों के आंदोलन का पूरा समर्थन करते हैं। मैं प्रदर्शन के लिए कई बार सिंघू बार्डर जा चुका हूं। आज भी यदि मेरे रिश्तेदार की शादी नहीं होती तो आप मुझे यहां अपने किसान साथियों के साथ खड़ा पाते।’’
हजारों किसान केंद्र के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए पिछले साल नवंबर से हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश से लगी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।
उत्तर प्रदेश में किसानों ने किया प्रदर्शन, नये कृषि कानून को वापस लेने की मांग करते हुए सौंपा ज्ञापन
केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में शनिवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने इन कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपा।
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता आलोक वर्मा ने कहा, ‘‘ हमने चक्का जाम में भाग नहीं लिया, लेकिन राज्य के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।’’ वहीं, बुंदेलखंड से मिली खबर के अनुसार प्रदेश के इस अंचल के सभी सात जिलों में ‘शांति पूर्ण’ प्रदर्शन कर किसानों केंद्र के नये कृषि क़ानूनों का विरोध किया। उन्होंने जिलाधिकारियों को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंप कर इन कानूनों को वापस लेने की मांग की।
बांदा के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) महेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि बुंदेलखंड किसान यूनियन से जुड़े कुछ किसानों ने अतर्रा कस्बे में कृषि मंडी के पास झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को सांकेतिक रूप से अवरूद्ध कर प्रदर्शन किया।
हमीरपुर के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनूप कुमार ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन ने चक्का जाम की घोषणा वापस ले ली थी। लेकिन, कुछ किसानों ने राठ कस्बे में शांति पूर्ण प्रदर्शन किया और कृषि कानून वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा।
ललितपुर जिले के अपर पुलिस अधीक्षक गिरिजेश कुमार ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में कुछ देर तक प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र के नये कृषि क़ानूनों के खिलाफ नारेबाजी की और अपना ज्ञापन सौंपा।
महोबा जिले के कुलपहाड़ के पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) रामप्रवेश राय के अनुसार, कुलपहाड़ कस्बे के गोंदी चौराहा पर किसानों ने कुछ देर के लिए नारेबाजी की और ज्ञापन देने के बाद कार्यक्रम समाप्त कर दिया।
चित्रकूट जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि किसानों ने सांकेतिक रूप से प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। आवागमन बाधित नहीं किया गया।
वहीं, बुंदेलखंड़ किसान यूनियन के अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया, ” संगठन से जुड़े किसानों ने बांदा जिले के अतर्रा कस्बे में कृषि मंडी के सामने चक्का जाम कर कृषि कानूनों का विरोध किया और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा।’’
अमेठी से मिली खबर के अनुसार जिला मुख्यालय अमेठी के गौरीगंज मे किसान नेताओं ने प्रदर्शन किया और तीनों क़ानूनों को वापस लेने के लिए एक ज्ञापन अपर जिलाधिकारी शैलेश प्रताप सिंह को सौपा।
किसान नेता रीता सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने हाथ में लाठी ,डंडे, हंसिया, खुरपा लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाए। सुरक्षा प्रबंधों के बीच लगभग 2 किलोमीटर तक मार्च करने के बाद अमेठी कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा गया।
कथित तौर पर किसानों के खिलाफ बयन देने को लेकर प्रदर्शनकारियों ने अभिनेत्री कंगना रनौत का पुतला भी फूंका। तिलोई तहसील क्षेत्र के इंहौना में किसानों ने प्रदर्शन किया और तिलोई एसडीएम योगेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा।
पंजाब-हरियाणा में किसानों ने ट्रैक्टर ट्रॉलियां खड़ी कर अवरुद्ध की सड़कें
किसानों ने शनिवार को तीन घंटे के ‘चक्का जाम’ आंदोलन के दौरान पंजाब और हरियाणा में सड़कों के बीचों-बीच अपनी ट्रैक्टर ट्रॉलियां खड़ी कर दीं और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई स्थानों पर प्रदर्शन में महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या में भागीदारी रही।
प्रदर्शन स्थलों के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगाये जाने, अधिकारियों द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित किये जाने और अन्य मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक तीन घंटे के चक्का जाम का एलान किया गया था।
भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा, ‘‘चक्का जाम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।’’
अधिकारियों ने कहा कि पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी और यातायात का मार्ग बदलने के लिये सभी प्रबंध किये गये थे। उनके अनुसार पंजाब और हरियाणा में पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये थे।
अंबाला के निकट शंभू में तथा पंजाब एवं हरियाणा में कई टॉल प्लाजा पर किसानों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि एंबुलेंस और स्कूल बसों को इस दौरान छूट दी गयी थी।
कुंडली-मानेसर पलवल एक्सप्रेसवे पर भी यातायात बाधित हो गया। प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि चक्का जाम के दौरान एंबुलेंस, सैन्य वाहनों एवं स्कूल बसों को छूट दी गयी थी।
कोकरीकलां ने कहा कि उनके संगठन ने पंजाब के संगरूर, बरनाला और बठिंडा समेत 15 जिलों के 33 स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध की।
किसानों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ‘जय जवान, जय किसान’ और ‘किसान एकता जिंदाबाद’ के नारे लिखे थे। उन्होंने नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं मानने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे भी लगाये।
सुबह के समय किसानों ने दोनों राज्यों में चक्का जाम के लिये प्रदर्शन स्थलों पर एकत्रित होना शुरू कर दिया। उन्होंने सड़कों पर ट्रैक्टर ट्रोलियां और अन्य वाहन खड़े कर दिये। पंजाब के संगरूर और लुधियाना समेत कई स्थानों पर अच्छी खासी संख्या में महिलाओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
शंभू में प्रदर्शनकारी ने कहा, सरकार को तीनों कानूनों को वापस ले लेना चाहिए क्योंकि ये कानून कृषक समुदाय के पक्ष में नहीं हैं। पंजाबी अभिनेताओं-बिन्नू ढिल्लों, देव खरौद और गायक पम्मी बाई ने पटियाला में प्रदर्शन किया।
फगवाड़ा में भारती किसान यूनियन (दोआब) नेता किरपाल सिंह मूसापुर ने बताया कि प्रदर्शनकारी एक चीनी मिल के पास धरने पर बैठ गये और उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाये। मूसापुर ने बताया कि प्रदर्शनकारी ने हार्न भी बजाया।
केंद्र के नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए किसान पिछले साल नवंबर से हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश से लगी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।
सत्ताधारी झामुमो एवं कांग्रेस ने किसान आंदोलन के समर्थन में पूरे राज्य में किया राजमार्ग जाम
झारखंड में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस एवं वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा शनिवार को किसान आंदोलन के समर्थन में राज्य के विभिन्न इलाकों में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों को दिन में कुछ घंटे के लिए जाम किया। इससे राजमार्गों पर यातायात बाधित रहा लेकिन इस दौरान कहीं से किसी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं है।
झारखंड पुलिस के प्रवक्ता पुलिस महानिरीक्षक साकेत कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के मेदिनीनगर, पलामू, देवघर, धनबाद, हजारीबाग, राजधानी रांची, कोडरमा आदि अनेक जिलों से दिन में बारह बजे राष्ट्रीय राजमार्ग अनेक स्थानों पर जाम किये जाने की सूचना है लेकिन इस दौरान कहीं से भी हिंसा की कोई सूचना नहीं है।
सिंह ने बताया कि सभी स्थानों पर धरना एवं सड़क जाम के कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे। उन्होंने बताया कि अधिकतर स्थानों पर सड़क जाम का यह कार्यक्रम कुछ समय का ही रहा जिससे आम लोगों को कुछ देर के लिए परेशानी हुई।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने दावा किया कि पूरे राज्य में किसानों के समर्थन में बंद रखा गया और आम लोगों ने इसमें पार्टी का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार किसानों का गला घोंटने का प्रयास कर रही है जिसे सफल नहीं होने दिया जायेगा।
इस बीच कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी आज राज्य में कांग्रेस समर्थित राजमार्ग बंद को पूरी तरह से सफल बताया और किसानों के हक मारने के लिए केन्द्र सरकार तथा भाजपा की आलोचना की।