नई दिल्ली। गंभीर बीमारी से उबरने के बाद लगातार रंगमंच पर सक्रिय रंगकर्मी, नाटककार, निर्देशक और अभिनेता आलोक शुक्ला को उनकी रंग सक्रियता के लिए पंचानन पाठक अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। 2 October की शाम नई दिल्ली स्थित श्री राम सेंटर में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
यह सम्मान प्रसिद्ध रंग निर्देशक अरविंद गौड़, हिम्मत सिंह नेगी, दर्पण गुप्ता, राजेश खोसला, विनोद पांचाल, गोविंद झा तथा महोत्सव प्रमुख दिनेश अहलावत सहित निर्णायक मंडल के सदस्यों ने प्रदान किया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद आलोक शुक्ला ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है, जिनके स्नेह, सहयोग और मार्गदर्शन ने उनकी रंगयात्रा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “प्रभु कृपा, माता-पिता, मेरे रंग गुरुओं और निर्देशकों तथा रंग साथियों के सहयोग के कारण ही मैं गंभीर बीमारी के बाद फिर रंगमंच पर सक्रिय हो सका हूं।”
उन्होंने अपने रंग गुरुओं और निर्देशकों हबीब तनवीर, प्रो. सतीश मेहता, अहमद ज़ैदी, अनवर सिद्दीकी, शिवदास घोडके, रंजीत कपूर, सत्यदेव दुबे, मकरंद देशपांडे, रामचंद्र विश्वनाथ सिंह, योगेश त्रिपाठी, राजेंद्र सक्सेना,राजीव राज, संजीव रजत शैलेंद्र गौड़ और राजेश अग्रवाल के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
आलोक शुक्ला ने अपनी रंग सक्रियता में सबसे पहला सहारा बनी धर्मपत्नी नीतू शुक्ला, रंग साथी प्रताप सिंह , सुनील चौहान एडवोकेट टेकचंद राजपूत, नीरूपमा बढ़ेरा,विजय लक्ष्मी, मृदुल कुमार, कविता, निकिता, सिमरन, मेघा, अंशु भटनागर, नीना, निखिल कुमार, विनय शर्मा, विकास कुमार, योगेश शर्मा, वागीश शर्मा, अभिमन्यू सिंह, अभिषेक, सौरभ शक्ति, जितेंद्र सिंह, अंजलि माथुर, नतेशा, मान्या सिंह, रूमा रजनी, अभ्युदय मिश्रा, आशीष मित्तल, शिब्बू हरविंदर, संजय सिंह, निशांत सिंह, अंकिता पटनायक, तुषार, लकी मल्होत्रा सहित उन सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त किया जो उनके हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।
बीमारी के बाद फिर शुरू हुई रथयात्रा
गौरतलब है कि जून 2020 में आलोक शुक्ला गंभीर GBS (Guillain-Barré Syndrome) paralysis से प्रभावित हुए थे। इस बीमारी के कारण उनके गले के नीचे का पूरा शरीर निष्क्रिय हो गया था। लेकिन कई सालों तक बिस्तर पर रहने के बावजूद उन्होंने लेखन और रंगमंच से अपना रिश्ता नहीं टूटने दिया।
बीमारी के बाद उनकी रंग सक्रियता की औपचारिक शुरुआत अगस्त 2023 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा राउरकेला, ओडिशा में आयोजित तीन दिवसीय प्ले राइटिंग वर्कशॉप से हुई, जिसमें आसिफ अली और अभिराम दामोदर भडकमकर के साथ उन्होंने बतौर प्रशिक्षक हिस्सा लिया। इसके लिए संगीत नाटक अकादमी और सुमन कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसके बाद 22 जनवरी 2024 को साहित्य कला परिषद, दिल्ली के नाट्य उत्सव में उनके नाटक ‘उसके साथ’ के मंचन के साथ उन्होंने सक्रिय रूप से रंगमंच पर वापसी की। इसके लिए उन्होंने साहित्य कला परिषद, राजकुमार, निर्णायक मंडल के सदस्य प्रताप सहगल, संगम पांडे और लोकेन्द्र त्रिवेदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इससे पहले बीमारी के दौरान वर्ष 2021 में उनका पहला नाट्य संग्रह ‘ख्वाबों के सात रंग’ प्रकाशित हुआ। उन्होंने इसके प्रकाशन के लिए राही पब्लिकेशन, सुशील भारती, ममता सोनी और संदीप मारवाह का आभार व्यक्त किया। इसके बाद उनके नाटकों को लगातार प्रकाशित करने के लिए उन्होंने इंडिया नेटबुक्स के डॉ. संजीव कुमार, समृद्धि पब्लिकेशन के विनय माथुर तथा संजना बुक्स की संजना तिवारी के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया।
चार दशक की रंगयात्रा
बता दें कि आलोक शुक्ला ने रीवा मध्य प्रदेश में वर्ष 1986 से अपने रंगकर्म की शुरुआत की । लगभग चार दशक की अपनी रंगयात्रा में उन्होंने करीब 50 नाटकों के 600 से अधिक मंचन किए हैं। उन्होंने एक दर्जन से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है और लगभग डेढ़ दर्जन नाटकों का लेखन किया है। उनके चार नाट्य संग्रह सहित कुल नौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
उनकी रंगयात्रा में अभिनय, निर्देशन और लेखन के साथ-साथ रंग प्रशिक्षण तथा रंग पत्रकारिता भी महत्वपूर्ण रही है। गंभीर बीमारी के बाद रंगमंच पर उनकी वापसी और लगातार सक्रियता ने उनकी रचनात्मक यात्रा को एक नया आयाम दिया है।
पंचानन पाठक अवार्ड 2026 को आलोक शुक्ला अपनी इस लंबी रंगयात्रा में मिले सम्मान के साथ-साथ उन सभी रंग साथियों, गुरुओं, परिवारजनों और संस्थाओं के प्रति सामूहिक सम्मान के रूप में देखते हैं, जिन्होंने कठिन दौर में उनका साथ दिया और उन्हें फिर से रंगमंच पर सक्रिय होने का अवसर दिया।
