नवी मुंबई। श्री गुरु तेग़ बहादुर जी की 350वीं शहादत पर संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार, साहित्य अकादेमी और पंजाबी कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन, नवी मुंबई के सहयोग से पंजाब हेरिटेज भवन में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “गुरु तेग़ बहादुर जी की विरासत” आयोजित की गई।
उद्घाटन सत्र में महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गुरु तेग़ बहादुर जी का बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता, मानव गरिमा और विवेक की रक्षा का इतिहासिक प्रतीक है और उनका संदेश आज की असहिष्णुता और विभाजन की चुनौतियों में समुचित प्रासंगिकता रखता है।
कार्यक्रम का स्वागत साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक, उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा व सचिव वरुण गुलाटी ने माननीय राज्यपाल को शॉल, स्मृति चिह्न और ग्रंथ भेंट करके किया। मंचासीन अतिथियों में महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, तख़्त श्री अबचल नगर के प्रशासक विजय सतबीर सिंह, तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। नवी मुंबई की महापौर सुजाता पाटिल और महाराष्ट्र विधान सभा सदस्य मंदा ताई म्हात्रे भी मौजूद रहीं।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र की अध्यक्षता पंजाबी परामर्श मंडल के संयोजक रवैल सिंह ने की; साहित्य अकादेमी सचिव वरुण गुलाटी और कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रुपिंदर ब्रार ने गुरु तेग़ बहादुर जी के जीवन, वाणी और उनके आदर्शों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
द्वितीय सत्र के अध्यक्ष प्रख्यात अभ्यासक संजय भाटिया थे; इसमें विद्वान गुरमीत सिंह सिद्धू ने “श्री गुरु तेग़ बहादुर का जीवन-दर्शन” और परवीन कुमार ने “गुरु तेग़ बहादुर जी की वाणी में वैराग्य” पर आलेख-पाठ किया। तृतीय सत्र में अभ्यासक मनप्रीत कौर वालिया ने “गुरु तेग़ बहादुर का विचार-दर्शन और वर्तमान में महत्त्व” विषयक प्रस्तुति दी; सत्र की अध्यक्षता अमरजीत सिंह ग्रेवाल ने की।
संगोष्ठी का समापन रवैल सिंह के वक्तव्य से हुआ। आयोजन के अंत में पंजाबी कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरबक्ष सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
