‘लव’ की चाल, ‘जिहाद’ का जाल

संजय तिवारी
मत-विमत Updated On :

केरल के केएम अशोकन अपने आपको नास्तिक मानते हैं। लेकिन 2016 में उन्होंने केरल पुलिस के पास एक केस दर्ज करवाया कि उनकी बेटी अखिला अशोकन लापता है। असल में होम्योपैथी का कोर्स करनेवाली अखिला पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया के संपर्क में आ गयी थी और पीएफआई ने उसका धर्म परिवर्तन करके उसे अखिला से हादिया बना दिया था। सफी जहां नामक व्यक्ति से उसका निकाह भी करवा दिया था।

नास्तिक अशोकन को अपनी बेटी का यह धर्म परिवर्तन मंजूर नहीं था और वो शफी जहां से अपनी बेटी की शादी को स्वीकार नहीं कर रहे थे। उन्हें अपनी बेटी अखिला के रूप में वापस चाहिए थी जिसकी लड़ाई उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी लेकिन आखिरकार वो हार गये। सुप्रीम कोर्ट ने बालिग हो चुकी लड़की को अपना फैसला लेने का अधिकार दिया और अखिला ने मां बाप की बजाय अपने शौहर शफी जहां के साथ जाना स्वीकार किया।

केरल का ये केस लव जिहाद का एक क्लासिक केस इसलिए बन गया क्योंकि इस पूरे मामले में पता चला कि कैसे कट्टरपंथी इस्लामिक ग्रुप गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना निशाना बनाते हैं, उनका माइंडवाश करते हैं और उन्हें इस्लाम कबूल करवाकर निकाह कर लेते हैं। केरल में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के निशाने पर न केवल हिन्दू लड़कियां हैं बल्कि ईसाई लड़कियां भी हैं। केरल के सबसे बड़े चर्च संगठन सायरो-मालाबार चर्च समूह के आर्कबिशप ने इसी साल जनवरी में आरोप लगाया था कि ईसाई लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है। इस आरोप का एक दूसरा पहलू ये भी है कि इन कन्वर्टेड लड़कियों को आतंकी गतिविधियों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

नवंबर 2019 में अफगानिस्तान में गिरफ्तार की गयी फातिमा अपने मुस्लिम पति के साथ त्रिवेन्द्रम से भागकर अफगानिस्तान गयी थी आईसिस की जंग लड़ने। फातिमा हिन्दू लड़की थी जिसका नाम निमिषा था। मुस्लिम जिहादियों के संपर्क में आने के बाद 2016 में न सिर्फ उसने अपना धर्म बदला बल्कि अपने पति के साथ जिहाद के लिए अफगानिस्तान चली गयी। नवंबर 2019 में जब उसे गिरफ्तार किया गया तब उसकी एक बेटी भी थी। अब मां बेटी दोनों काबुल की जेल में हैं।

ये चंद उदाहरण ये समझाने के लिए पर्याप्त हैं कि केरल में लव का इस्तेमाल जिहाद के लिए किया जा रहा है लेकिन सरकार, कानून और धार्मिक समुदाय सब इसके आगे लाचार हैं। लेकिन केरल में ही ये हो रहा है, ऐसा भी नहीं है। उत्तर भारत में भी लव जिहाद की घटनाएं आये दिन सामने आ रही हैं। भले ही यहां शिकार बनायी जा रहीं लड़कियां आईसिस के रिक्रूट नहीं होती लेकिन कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां लव जिहाद का शिकार बनी हिन्दू लड़की का इस्तेमाल करने के बाद या तो उनकी हत्या कर दी जाती है या फिर यातना देकर घर से भगा दिया जाता है। झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जहां मुस्लिम ने हिन्दू लड़कियों से निकाह किया और बाद में प्रताड़ित करके घर से निकाल दिया।

2017 में रांची का तारा सहदेव मामला तो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर तारा सहदेव होटवार के शूटिंग रेन्ज में जहां प्रैक्टिस करने जाती थीं वही रंजीत कोहली नामक एक व्यक्ति उन्हें मिला। धीरे धीरे जान पहचान प्यार में बदल गयी और तारा ने रंजीत नामक व्यक्ति से 2014 से विवाह कर लिया। विवाह के बाद एक दिन घर पर आई एक चिट्ठी से पता चला कि ये रंजीत कोहली नहीं बल्कि रकीबुल हसन है। इस सच्चाई के सामने आने के बाद रकीबुल हसन और उसके परिवार वालों ने तारा सहदेव पर अत्याचार शुरु कर दिये। उनके हिन्दू रीति रिवाज पर रोक लगाने की कोशिश शुरु हुई और तारा पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरु हुआ। तारा ने इसे अस्वीकार कर दिया और रांची की एक अदालत में तलाक की अर्जी लगा दी। 2018 में आखिरकार तारा को रकीबुल हसन से तलाक मिल गया और वो एक इस्लामिस्ट के चंगुल से आजाद हो गयीं।

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लेकिन लव जिहाद के फैले जाल में सबका भाग्य तारा जैसा नहीं होता। उत्तर प्रदेश में हाल में ही मेरठ से दो ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आयीं जिसमें लव की शिकार लड़किया जिहाद की भेंट चढ गयीं। इन दोनों ही मामले में मुस्लिम लड़कों ने हिन्दू लड़कियों को अपने जाल में फंसाने के लिए अपना नाम और पहचान हिन्दू बताया और असली पहचान सामने आने पर लव की शिकार लड़कियों का कत्ल करके जमीन में गाड़ दिया।

इसमें सबसे चर्चित रहा एकता देशवाल का मामला जिसे मेरठ के शाकिब ने जालंधर में अपने जाल में फंसाया था। एकता को शाकिब ने अपना नाम अमन बताया और उसे अपने प्रेमजाल में फंसाकर मेरठ लेकर चला आया। बीकॉम की छात्रा एकता को मेरठ पहुंचने पर पता चला कि जिसे वह अमन समझ रही थी असल में वह शाकिब है। इसके बाद दोनों में तकरार हुई और शाकिब ने अपने घरवालों के साथ मिलकर एकता की हत्या कर दी। एकता अपने साथ नौ लाख रूपये मूल्य के गहने और नकद लेकर आयी थी। उसे शाकिब और उसके परिवारवालों ने अपने पास रख लिया। लेकिन एक दिन अचानक खेत में लाश मिलने से मामला खुल गया और मेरठ पुलिस ने जांच पड़ताल किया तब ये मामला सामने आया।

मेरठ में ही दूसरा मामला शमशाद और प्रिया का है। शमशाद मेरठ के पास मोदीनगर में रहता था और फेसबुक के जरिए उसने लोनी में रहनेवाली प्रिया से दोस्ती कर ली। शमशाद एक फेक आईडी अमित गुर्जर के नाम से प्रिया से मिला और अंतत: तलाकशुदा प्रिया ने अमित गुर्जर उर्फ शमशाद के साथ रहने का फैसला कर लिया। प्रिया तलाकशुदा थी और उसकी एक दस साल की बेटी भी उसके साथ थी। लेकिन शमशाद की पहचान उजागर होने पर शमशाद ने मां बेटी दोनों की हत्या करके अपने घर के भीतर ही गाड़ दिया।

प्रिया की एक दोस्त चंचल ने बहुत दिनों तक जब प्रिया का पता न चला तो खोजबीन किया। उसने पुलिस पर दबाव डाला कि वह अमित गुर्जर से पूछताछ करे। कुछ हिन्दूवादी संगठनों के आगे आने के बाद जब पुलिस ने अमित गुर्जर से कड़ाई से पूछताछ किया तब सारी सच्चाई सामने आई। इस घटना से न सिर्फ मेरठ बल्कि देश का नेशनल मीडिया भी दहल गया।

(जारी…..)