चंपारण सत्याग्रह का महत्वपूर्ण केंद्र अब खंडहर: हजारीमल धर्मशाला की दर्दनाक उपेक्षा

बेतिया। 1917 में जब महात्मा गांधी चंपारण पहुँचे, तो उन्होंने सत्याग्रह की शुरुआत के दौरान बेतिया स्थित हजारीमल धर्मशाला में लंबे समय तक निवास किया। हजारीमल झुनझुनवाला ने ब्रिटिश दबाव के बावजूद इस धर्मशाला को गांधी जी और उनकी टीम के लिए उपलब्ध कराया था, जबकि उस समय बहुत कम लोग उन्हें ठहराने का साहस कर पा रहे थे।

यह स्थान शीघ्र ही चंपारण सत्याग्रह का प्रमुख केंद्र बन गया। आसपास के गाँवों के नील-किसान यहाँ इकट्ठा होकर अंग्रेजी अत्याचारों की अपनी व्यथा सुनाते थे। गांधी जी की टीम -जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आचार्य जे.बी. कृपलानी और ब्रजकिशोर प्रसाद प्रमुख थे – यहीं बैठकर किसानों के बयान दर्ज करती और आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार करती थी।

जब यात्रा दल इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने पहुँचा, तो सामने जो दृश्य था, वह अत्यंत दुखद था। चंपारण आंदोलन का वह मुख्य केंद्र अब एक बड़े शॉपिंग मॉल की छाया में दबकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। दीवारों पर जंगली पेड़ उग आए हैं और आसपास कचरे के ढेर लगे रहते हैं।

बिहार सरकार इसे “गांधी सर्किट” का हिस्सा बताती है, लेकिन वास्तव में यह पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही और उपेक्षा का शिकार है। संरक्षण के अभाव में चंपारण सत्याग्रह की यह महत्वपूर्ण इमारत जल्द ही हमेशा के लिए दम तोड़ सकती है।

First Published on: April 19, 2026 11:25 AM
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