बेगूसराय। एक ऐसा सनसनीखेज मामला जिसे शुरुआत में आत्महत्या बताकर फाइल बंद कर दी गई थी, वह अब पांच साल बाद फिर से खुल गया है। बेगूसराय में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डन रिंकू कुमारी की मौत अब एक रहस्य बन चुकी है। सवाल वही है, क्या यह आत्महत्या थी या सुनियोजित हत्या?
पटना हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए नई जांच का आदेश दिया है और जिम्मेदारी विकास वैभव को सौंपी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब एसआईटी पुराने सबूतों की दोबारा जांच करेगी और पूर्व की जांच में शामिल अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा सकती है। वहीं, घटना के पांच साल बाद परिवार को न्याय की नई किरण दिख रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि रिंकू कुमारी मौत मामला क्या था और ये रहस्यमयी कैसे होता चला गया।
4 अप्रैल 2021 की सुबह रिंकू कुमारी अपने घर से स्कूल के लिए निकलीं। सब कुछ सामान्य था। लेकिन दोपहर करीब 2 बजे खबर आई कि उनका शव स्कूल परिसर में मिला है। गले में फंदा था। खास बात यह कि छत के पंखे से बंधा दिखाया गया, लेकिन शरीर जमीन पर पड़ा था। तस्वीरों में बाद में बैठी हुई स्थिति भी सामने आई। कमरे में धूल-मिट्टी, बिखराव और हालात कुछ और ही कहानी कह रहे थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि स्कूल का सीसीटीवी सुबह 7.18 बजे से दोपहर 1.24 बजे तक बंद था। यानी घटना के पूरे समय का कोई रिकॉर्ड ही नहीं। ऐसे में सवाल यह उठा कि यह महज संयोग था या किसी साजिश का हिस्सा? बस फिर क्या था- यही सवाल शुरुआत से खड़ा रहा, लेकिन अब तक इसका जवाब नहीं मिला है।
बता दें कि इस मामले की जांच आगे बढ़ी तो पैसों का एक एंगल सामने आया। परिवार के मुताबिक रिंकू कुमारी ने अपने पड़ोसियों को जमीन के बदले 15 लाख रुपये एडवांस दिए थे। लेकिन न तो जमीन मिली और न ही पैसा वापस हुआ। 4 अप्रैल 2021 को ही पंचायत में इस विवाद को सुलझाने की बात तय हुई थी। परिवार का आरोप है कि इसी पैसे के विवाद ने जान ले ली। उनकी बेटी तेजस्विनी कुमारी ने साफ कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है।
घटना के अगले दिन केस दर्ज हुआ। लेकिन पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया। परिवार जिन लोगों पर शक जता रहा था, उनके नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए गए? सीसीटीवी बंद क्यों था? शव की स्थिति अलग क्यों थी? संघर्ष के निशान क्यों थे? जाहिर है कि इन सवालों की गहराई से जांच नहीं हुई और इसके जवाब भी नहीं मिले, लेकिन अक्टूबर 2021 में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। निचली अदालत ने 9 अप्रैल 2025 को इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। यानी पांच साल तक केस लगभग बंद ही रहा।
मगर परिवार हार नहीं माना। बेटी तेजस्विनी कुमारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जब पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने 8 अप्रैल 2026 को अपना फैसला सुनाया। करीब 40 पन्नों के आदेश में कोर्ट ने साफ कहा कि शुरुआती जांच में गंभीर खामियां थीं। आत्महत्या की थ्योरी को खारिज कर दिया गया और क्लोजर रिपोर्ट रद्द कर दी गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि निष्पक्ष जांच हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस केस में सबसे अहम मोड़ तब आया जब कोर्ट ने जांच सीधे आईजी विकास वैभव को सौंप दी गई। यह एक असामान्य फैसला माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने किसी अधिकारी का नाम लेकर भरोसा जताया। विकास वैभव को एसआईटी बनाने की पूरी छूट दी गई है। माना जा रहा है कि अब यह टीम पुराने सबूतों को फिर से खंगालेगी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी का बंद होना और पंचायत विवाद… हर पहलू की नई जांच होगी।
नई एसआईटी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है । क्या यह आत्महत्या थी या एक सुनियोजित हत्या? पांच साल में कई सबूत कमजोर हो चुके होंगे, लेकिन तकनीकी जांच और पुराने रिकॉर्ड से सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि पहले की जांच में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा हो सकती है। यानी अब जांच सिर्फ घटना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जांच प्रक्रिया भी जांच के दायरे में होगी।
साफ है कि रिंकू कुमारी केस अब सिर्फ एक मौत का मामला नहीं रहा। यह सिस्टम की कार्यशैली और जांच की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है। पांच साल बाद एक बार फिर सच सामने लाने की कोशिश शुरू हुई है। परिवार को उम्मीद है कि इस बार न्याय मिलेगा। ऐसे में आम लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या यह केस सच्चाई तक पहुंचेगा या फिर रहस्य ही बना रहेगा।
