राजधानी दिल्ली में छठ पर्व की अनुपम छटा हर ओर दिखाई दे रही है। कोरोना की लहर कमजोर होने के बाद यहां लोगों में छठ के प्रति उत्साह देखते ही बन रहा है। हालांकि यमुना में जहरीले झाग और दम घुटने वाले पानी के बीच श्रद्धालुओं के स्नान करने की तस्वीरें बीते दिन वायरल हुई थी जिसे देखकर हर कोई जहां सरकार से सवाल कर रहा है वहीं सरकार छठ जैसे महापर्व पर भी राजनीति करते दिखी। बता दें कि दिल्ली सरकार ने यमुना घाट पर छठ पूजा की अनुमति नहीं दी है जिसके लिए कई महीनों से भूख हड़ताल और पक्ष विपक्ष एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। दिल्ली में सरकार द्वारा कई जगहों पर घाट बनाए गए हैं जहां व्रती सूर्य देव को अर्घ्य देंगे।
भले ही यमुना पर श्रद्धालुओं को छठ पर्व मनाने की अनुमति नहीं मिली लेकिन यमुना पार के लोगों में छठ के प्रति उत्साह में कोई कमी दिखाई नहीं नहीं दी जिसका सारा श्रेय यहां इन इलाकों के विधायकों और प्रतिष्ठित आयोजकों को जाता है। जिन्होंने यमुना की छटा इन छोटे-छोटे घाटों के निर्माण द्वारा दिखाया। इन्हीं घाटों का अद्भुत दृश्य पूर्वी दिल्ली के गणेश नगर इलाके में देखने को मिला। पूर्वी दिल्ली के प्रसिद्ध विद्यालय दिल्ली कान्वेंट स्कूल में बने इस घाट में श्रद्धालु उमड़ पड़े। यह वह स्थान है जहां दशहरा हो या सरस्वती पूजा किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान इस पवित्र विद्यालय में अकसर होते आप देख सकते हैं। इसी परंपरा को बरकरार रखते हुए यहां छठ महापर्व बड़े ही साफ-सफाई और कोरोना के सभी नियम का पालन करते हुए हर्षोल्लास से मनाया गया।
कहीं पर नदी तो कहीं नहर पर बने छठ घाट को सजाया गया। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य इन्हीं घाटों से दिया गया। छठ की छटा इस घाट पर देखते ही बना जिसका श्रेय बिहार एकता मंच को दिया जाता है। लक्ष्मीनगर के विधायक अभय वर्मा ने घाट का निरीक्षण किया और तैयारी का जायजा लिया। तथा घाटों पर सभी आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि छठ व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। श्रद्धा,भक्ति एवं लोकआस्था का महापर्व छठ के सफल, सुचारू आयोजन को लेकर बिहार एकता मंच के अध्यक्ष पप्पू निराला और अभिरक्षक सुनील कुमार ने व्यवस्था का पूर्ण रूप से ध्यान रखा ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़ें। महासचिव दुर्गा प्रसाद, केशियर गणेश कुमार और वॉइस प्रेजिडेंट अरुण कुमार मुख्य रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। 150 से 200 लोगों और उनके परिवारों ने इस घाट पर आकर छठ पूजा किया और अस्त होते सूर्य को अर्घ दिया। इस मनोरम दृश्य को देखने के लिए मोहल्ले के लोग भी बहुतायत में दिखाई दिए।
इसके अतिरिक्त घाटवार पदाधिकारियों की तैनात किया गया है। घाट पर कोविड मानक का पालन कराने हेतु मास्क / सैनिटाइजर का अनिवार्य प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है। कोविड संबंधी विस्तृत दिशानिर्देश के पालन के लिए माइक से बार-बार घोषणा की जा रही थी। कोविड का खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है इसलिए लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क एवं सजग रहना है। घाटों पर अधिक भीड़ भाड़ नहीं लग जाए या जो भीड़ आयी है वह आराम से पूजा कर सके इसके लिए विशेष रूप से टीम लगायी गयी है जो सभी प्रकार के दिशानिर्देशों का पालन करा रहे हैं।
आपको बता दें कि छठ के महापर्व में किसी मूर्ति विशेष की पूजा नहीं होती। इस पर्व में सूर्य की उपासना की जाती है जो प्रत्यक्ष देवता के रूप में हमारे बीच मौजूद हैं जो हमें प्रकाशित करते हैं जिनका दर्शन हमें रोज प्राप्त होता है और जिनके दर्शन के बिना हमारे जीवन में सिर्फ अंधकार है। सूर्य समस्त लोकों में ऊर्जा के केन्द्र माने गए हैं। मान्यता है की सूर्य की उपासना करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा गया है। छठ में कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य का ध्यान करने की प्रथा है।









