नई दिल्ली। कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर में चंदा/चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इसे “सुनियोजित लूट” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चुप्पी तोड़ने की मांग की है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राम मंदिर के चंदे की लूट कोई “छोटी-मोटी चूक” नहीं थी, बल्कि यह एक सुनियोजित और संगठित लूट थी। यह लूट महीनों तक CCTV कैमरों के सामने होती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि चंदे की चोरी से राम मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंची है। सिंघवी ने सवाल किया, “BJP के रावण भगवान राम के सामने अपना चेहरा कैसे दिखाएंगे?” उन्होंने राम मंदिर लूट की फोरेंसिक ऑडिट की मांग की और कहा कि जो मामला सामने आया है, वह तो बस एक छोटी सी झलक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए प्रमुख बयान
राजीव भवन स्थित DPCC ऑफिस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और महासचिव (संगठन) व संचार विभाग के चेयरमैन अनिल भारद्वाज के साथ सिंघवी ने कहा कि “असली सवाल यह नहीं है कि चोरी किसने की, बल्कि यह है कि उन्हें ऐसा करने किसने दिया।”
सिंघवी ने इसे आस्था का अपमान और करोड़ों भक्तों के भरोसे के साथ धोखा बताया। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर सवाल उठाया। SIT की रिपोर्ट में उनका नाम नहीं आने पर हैरानी जताई, जबकि निचले स्तर के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- SIT रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 (केवल 40 दिनों) में चंदा गिनती कक्ष से 70 चोरी की घटनाएं हुईं।
- ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने चंपत राय की देखरेख का जिक्र किया था।
- ट्रस्ट और SBI के बीच MoU व SOPs में सख्त प्रावधान थे, फिर भी लूट हुई।
सिंघवी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह एक मां या मजदूर के छोटे-छोटे दान की चोरी है, जो भरोसे और आस्था की चोरी है।
कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस पार्टी जानना चाहती है:
- प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे?
- चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी समेत बड़े पदाधिकारी जवाबदेही से कैसे बच सकते हैं?
- पूरा ट्रस्ट शक के घेरे में होने पर केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों?
- ‘डबल इंजन’ वाली BJP सरकार दोषियों को बचा रही है?
- केंद्र सरकार सच सामने आने से डर रही है?
- सब कुछ पारदर्शी था तो इस्तीफे क्यों हुए?
- अब तक बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां क्यों नहीं हुईं?
देवेंद्र यादव ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। पीएम मोदी की चुप्पी भक्तों के साथ धोखा है। उन्होंने 1958 के श्रीनाथ मंदिर मामले का उदाहरण देते हुए नेहरू की तुलना की। अनिल भारद्वाज ने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
