केजरीवाल सरकार 25 फीसद बजट शिक्षा पर खर्च करती है-आतिशी


दिल्ली के लिबासपुर गांव में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नई स्कूल बिल्डिंग के उद्घाटन अवसर पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो दिल्ली को रोकते रहे और हम दिल्ली के लोगों के लिए काम करते रहे। आज दिल्ली के लिबासपुर गांव में बेहद ही शानदार स्कूल बिल्डिंग की शुरुआत की।


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दिल्ली Updated On :

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को बादली विधानसभा क्षेत्र के लिबासपुर में नई बिल्डिंग का उद्घाटन किया। चार मंजिला बनी स्कूल बिल्डिंग में 60 क्लासरूम, 8 लैब, 2 लाइब्रेरी व लिफ्ट समेत सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जहां दो हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। अब लिबासपुर, जीवन पार्क, राणा पार्क, भगत सिंह पार्क, संजय कॉलोनी, स्वरूप नगर के बच्चों को 3-4 किमी दूर समयपुर व सीतापुर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। स्कूल में छात्र साइंस, कॉमर्स, आर्ट व वोकेशनल विषय की पढ़ाई कर पाएंगे। साथ ही, मुक्केबाजी और कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए भी सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आतिशी के अलावा बादली के विधायक अजेश यादव, शिक्षा सचिव अशोक कुमार, शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता मौजूद रहे।

दिल्ली के लिबासपुर गांव में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नई स्कूल बिल्डिंग के उद्घाटन अवसर पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो दिल्ली को रोकते रहे और हम दिल्ली के लोगों के लिए काम करते रहे। आज दिल्ली के लिबासपुर गांव में बेहद ही शानदार स्कूल बिल्डिंग की शुरुआत की। ये सरकारी स्कूल किसी भी प्राइवेट स्कूल से बेहतर और शानदार है। मॉडर्न क्लासरूम से लेकर लाइब्रेरी तक आपको आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं देखने को मिलेंगी। हम साफ़ नीयत और लगन से जनता के लिए काम करते हैं। इसलिए तमाम रूकावटों के बाद भी हम लोगों के लिए ये सब कर पाते हैं। हमने सरकारी स्कूलों में शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छी शिक्षा की व्यवस्था कर अमीर-गरीब के बीच की खाई को खत्म कर दिया है।

पहले गरीब लोग मजबूरी में अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजते थे- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पहले सरकारी स्कूलों का बहुत बुरा हाल होता था। स्कूल टैंट में चला करते थे। स्कूल की दीवारें नहीं होती थीं। क्लास में पंखे नहीं होते थे, टॉयलेट और पानी की सुविधाएं भी नहीं होती थी। बच्चे स्कूल में घंटे-दो घंटे रूकते थे और फिर वापस घर चले जाते थे। स्कूल में कोई पढ़ाई भी नहीं होती थी। एक गरीब आदमी बड़ी मजबूरी में अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में भेजता था। दिल्ली में अमीर लोगों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाते थे और गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूल में जाते थे। हमारी सरकार ने दिल्ली के अंदर अमीर-गरीब के बीच की खाई खत्म कर दी। अब सरकारी स्कूल भी प्राइवेट स्कूलों की तरह शानदार हो गए हैं। हमारे सरकारी स्कूलों के अच्छे नतीजे आने लगे हैं। अब दिल्ली के लोगों की मर्जी है कि वे अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में भेजें या सरकारी स्कूल में भेजें।

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अच्छी हो गई है, अब आपको अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने की जरूरत नहीं- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब दिल्ली में सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के स्कूलों में पढ़ाई अच्छी हो गई है। दिल्ली के कम से कम 80 फीसद प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा अच्छे सरकारी स्कूल हो गए हैं। अब आपको अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने की जरूरत नहीं है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अच्छी होती है और नतीजे भी अच्छे आते हैं। इसके लिए मैं दिल्ली सरकार के स्कूलों के शिक्षकों को सलाम करता हूं। प्रधनाचार्यों और शिक्षकों ने बहुत ही शानदार काम किया है। सभी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने मिलकर सरकारी स्कूलों के अच्छा बनाया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार से पहले इन शिक्षकों को गाली दिया जाता था। कहा जाता था कि सरकारी स्कूल के टीचर पढाते नहीं हैं। आलसी हैं और महिला टीचर पेड़ के नीचे बैठ कर स्वेटर बुनती रहती हैं। आज भी वही टीचर हैं, जो पहले थे। हमने किसी टीचर को नहीं बदला। उन्हीं टीचरों ने स्कूलों में परिवर्तन का काम शुरू किया।

अब दिल्ली में एक ईमानदार सरकार है, इसलिए सारी व्यवस्था बदल गई है- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं केवल अपने मंत्री और विधायकों के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में इतना बड़ा परिवर्तन नहीं ला सकता था। सरकारी स्कूलों को शानदार करने का श्रेय मेरे 60 हजार शिक्षकों को जाता है। इन्होंने मिलकर दिल्ली की शिक्षा क्रांति में कमाल करके दिखाया है। दिल्ली में सिर्फ व्यवस्था बदली और अब ईमानदार सरकार आ गई है। अगर सरकार ईमानदार हो, मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक ईमानदार हो तो व्यवस्था बदल जाती है। अब दिल्ली में एक ईमानदार सरकार है, इसलिए सारी व्यवस्था बदल गई है। लिबासपुर में बना यह स्कूल न सिर्फ दिल्ली का सबसे बेहतरीन स्कूल है बल्कि पूरे देश में ऐसा स्कूल नहीं है। मैं इसकी चुनौती दे सकता हूं।

समाजसेवी चौधरी राम शरण यादव के नाम पर लिबासपुर स्कूल का नाम करने पर विचार करेंगे- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस स्कूल में करीब दो हजार बच्चे पढ़ेंगे। इसी के पास ही एक एडेड स्कूल भी है। चौधरी राम शरण यादव के प्रयासों से यहां स्कूल बना था। इसके अलावा भी चौधरी राम शरण यादव ने समाज के लिए कई अच्छे काम किए हैं। कई गांवों का मेरे पास प्रस्ताव आया है कि स्कूल का नाम चौधरी राम शरण यादव के नाम पर खा जाए। इस बारे में हमारी सरकार जरूर विचार करेगी।

5-7 साल में दिल्ली में नर्सरी से लेकर 12वीं तक के स्कूल बहुत शानदार बना देंगे- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की जनता ने अपना प्यार दिखाते हुए हमें दिल्ली नगर निगम की भी जिम्मेदारी दी है। हम अगले 5-7 साल में दिल्ली में नर्सरी से लेकर 12वीं तक के स्कूल बहुत शानदार बना देंगे। अभी नगर निगम में स्कूलों का बहुत बुरा हाल है। हम लोगों ने नगर निगम के स्कूलों को भी ठीक करना शुरू कर दिया है। नगर निगम के शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए अहमदाबाद के आईआईएम भेजने जा रहे हैं। हालांकि नगर निगम के स्कूलों को ठीक करने में थोड़ा समय लगेगा। जैसे दिल्ली सरकार के स्कूलों को ठीक करने में पांच-सात साल लगे, वैसे ही एमसीडी के स्कूलों को भी पांच-सात में ठीक कर देंगे। इसके बाद पूरे दिल्ली के अंदर नर्सरी से लेकर 12वीं तक स्कूल बहुत शानदार होंगे।

हम युवाओं के लिए कई सारे रोजगार परक प्रोग्राम चला रहे हैं- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने जॉब को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बच्चे पढ़-लिख तो जाते हैं लेकिन डिग्री लेकर बेरोजगार घूम रहे हैं। नौकरी-रोजगार ही नहीं है। कई बार मेरे मन में ख्याल आता है कि ऐसी डिग्री का क्या फायदा है जब नौकरी ही नहीं है। अधिक से अधिक रोजगार पैदा करने के लिए दिल्ली सरकार लगी हुई है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम कई सारे रोजगार परक प्रोग्राम चला रहे हैं। 12वीं के बाद जो बच्चे कॉलेज में जाना चाहें, उनको कॉलेज में एडमिशन मिलना चाहिए, लेकिन जो बच्चा गरीबी की वजह से 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई न कर पाए तो उसको रोजगार मिलना चाहिए। जिससे कि वो अपना और अपने परिवार का गुजारा कर सके।

अगर सभी एकजुट जो जाएं तो बच्चों के लिए रोजगार का इंतजाम कर सकते हैं- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं राजनीति में नया हूं, लेकिन पिछले 7-8 साल में मैंने एक ही चीज सीखी है कि कुछ भी असंभव नहीं है। अगर हम सभी लोग एकजुट जो जाएं तो अपने सारे बच्चों के लिए रोजगार का इंतजाम कर सकते हैं। हमने काफी बच्चों को रोजगार दिलवाया भी है। लेकिन अब सरकार एक सूत्रीय कार्यक्रम लेकर चल रही है कि जब तक रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक सारे प्रोग्राम बेकार हैं। लोगों के घर का खर्च चलना, बच्चों को पालना सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चे बड़े हों तो उनको कोई नौकरी मिले या फिर उनके पास कोई रोजगार होना चाहिए। हमारा ज्यादा से ज्यादा जोर इस बात पर है कि बच्चा बड़ा होकर नौकरी देने वाला बने। वो अपना खुद का रोजगार करे और दो-चार लोगों को और रोजगार दे। नौकरी तलाशने वाला न बने। इस दिशा में हम कई सारे काम कर रहे हैं।

लिबासपुर का ये स्कूल बहुत शानदार बना है, क्षेत्र के लोगों को देखना चाहिए- अरविंद केजरीवाल

इस अवसर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्थानीय लोगों से स्कूल बिल्डिंग का निरीक्षण करने का अनुरोध करते हुए कहा कि लिबासपुर में बहुत शानदार स्कूल बनकर तैयार हुआ है। क्षेत्र के लोगों को स्कूल के अंदर जाकर देखना चाहिए कि उनके क्षेत्र का स्कूल कितना शानदार बना है। यह बहुत ही शानदार बना हुआ है। स्कूल के अंदर बहुत ही शानदार क्लास रूम, लैब और लाइब्रेरी और बातानुकूलित हॉल बना हुआ है। हर कोई सोच भी नहीं सकता है कि सरकारी स्कूल भी इतना शानदार हो सकता है। कभी हमने सपने में भी नहीं सोचा था। दिल्ली में स्थित प्राइवेट स्कूल भी इस सरकारी स्कूल के मुकाबले कुछ नहीं हैं। यह बहुत बडी बात है।

पहले सरकारी स्कूलों में कोई भविष्य नहीं था, इसलिए गरीब मां-बाप मजबूरी में अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजते थे- आतिशी

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि लिबासपुर का यह सरकारी स्कूल दिल्ली व देश के प्राइवेट स्कूलों से शानदार है। 7-8 साल पहले तक कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि दिल्ली में इतने शानदार सरकारी स्कूल होंगे। आठ साल पहले दिल्ली के सरकारी स्कूलों को देखकर रोना आता था। स्कूल के अन्दर टॉयलेट की बदबू आती थी, खिड़कियां-पंखे टूटे होते थे, बच्चों के बैठने के लिए बेंच और पीने के लिए पानी तक नहीं होता था। उस समय माता-पिता अपने बच्चों को दिल पर पत्थर रख कर सरकारी स्कूलों में भेजते थे। क्योंकि उनके पास महंगे प्राइवेट स्कूल की महंगी फीस देने के लिए पैसे नहीं होते थे। गरीब माता-पिता अपना पेट काटकर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने को मजबूर थे क्योंकि सरकारी स्कूलों में बच्चों का कोई भविष्य नहीं था।

दिल्ली देश का इकलौती राज्य है, जो शिक्षा पर अपने बजट का 25 फीसद हिस्सा खर्च करता है- आतिशी

शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि 2014 में दिल्ली के लोगों ने भारी बहुमत से जीता दिलाकर अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाया। तब अरविंद केजरीवाल ने एक सपना देखा कि अमीर और गरीब के हर बच्चे को देश की सबसे अच्छी शिक्षा पाने का अधिकार है और आज इस सपने को हकीकत में तब्दील होते हुए देख कर हम सभी को बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की सरकार देश की पहली ऐसी इकलौती सरकार है जो अपने बजट का 25 फीसद हिस्सा शिक्षा पर लगाती है। इस देश के इतिहास में न 2014 से पहले और न बाद में कोई ऐसी सरकार आई है जो अपने बजट का 25 फीसद हिस्सा बच्चों की शिक्षा पर खर्च करती हो। उन्होंने कहा कि इन बीते 9 सालों में वर्ल्ड क्लास स्कूल बनकर न सिर्फ क्लासरूम के अंदर डेस्क और स्मार्टबोर्ड लगाए गए बल्कि पहली बार देश के इतिहास में सरकारी स्कूल के टीचरों और प्रिंसिपल्स को विदेश में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, ताकि वो हमारे बच्चों को वर्ल्ड क्लास की शिक्षा दे सकें।

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में हर तबके के बच्चों को सपने देखने का अवसर दिया है- आतिशी

शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि लिबासपुर के इस नई बिल्डिंग में बने सुन्दर कमरे और शानदार लैब देखकर विश्वास नहीं होता कि ये सरकारी स्कूल है। मैं चुनौती के साथ कह सकती हूं कि इस स्कूल जैसी सुन्दर लाइब्रेरी भारत के किसी स्कूल में नहीं मिलेगी। ऐसी लाइब्रेरी लंदन के स्कूलों में देखने को मिलती है। लिबासपुर जैसी ही दिल्ली के कोने-कोने में शानदार स्कूल की बिल्डिंग बन रही है, जो दिखा रहा है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव किया है।

पिछले पांच साल से दिल्ली सरकार के स्कूलों के बोर्ड के नतीजे प्राइवेट स्कूलों से बेहतर आ रहे हैं। आज दिल्ली सरकार के स्कूल से बच्चे पढ़कर आईआईटी और नीट जैसे एग्जाम क्लियर कर रहे हैं। देश के सबसे बड़े बड़े इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले रहे है। इस साल भी 1000 से ज्यादा बच्चों ने नीट का एग्जाम क्लियर किया है, जबकि 700 से ज्यादा बच्चों ने जेईई क्वालीफाई किया है। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली में रहने वाले हर बच्चे को एक सपना देखने का अवसर मिला है कि वो चाहे अमीर या गरीब परिवार से ही क्यों न हो लेकिन उसे शानदार पढ़ाई कर देश की सबसे बड़ी नौकरी कर सकता है और एक दुकान में मैकेनिक बनने के बजाए बड़ा इंजीनियर या कार कंपनी का सीईओ बन सकता है।

2020 में शुरू हुआ था बिल्डिंग का निर्माण कार्य

दिल्ली के लिबासपुर गांव स्थित सर्वाेदय को-एड विद्यालय की नई बिल्डिंग को पीडब्ल्यूडी ने बनवाया है। स्कूल परिसर में खाली पड़ी जमीन पर भूतल के अलावा तीन मंजिला ये बिल्डिंग बनी है। 2012 में ग्रामसभा ने स्कूल बनवाने के लिए दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को 14763 वर्ग मीटर जमीन दी थी, तभी जमीन की बाउंड्री कर दी गई थी। इस नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य वर्ष 2020 में शुरू हुआ था और मार्च 2023 में पूरा कर दिया गया। 14763 वर्ग मीटर जमीन में से करीब 3009 वर्ग मीटर जमीन पर ये बिल्डिंग बनी हुई है।

बिल्डिंग में बने तीन ब्लॉक के 50 कमरों में चलेंगी कक्षाएं

नई बिल्डिंग में तीन ब्लॉक हैं। इसमें 50 क्लासरूम हैं। इसके अलावा 8 लैब्स, 2 लाइब्रेरी के साथ- साथ ऑफिस और स्टाफ रूम के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए भी अलग कमरे बने हुए हैं। हर फ्लोर तक जाने के लिए सीढियों के अलावा लिफ्ट की भी सुविधा दी गई है। एक साथ 200 से अधिक लोगों की बैठने की क्षमता के साथ पूरी तरह से वातानुकूलित मल्टी परपज हाल है।

स्कूल में नर्सरी से 12वीं तक की होगी पढ़ाई

यह लड़कों और लड़कियों के लिए एक सिंगल शिफ्ट सर्वाेदय को-एड विद्यालय है। इस नई बिल्डिंग में वर्तमान शैक्षिक सत्र से नर्सरी से 12वीं तक की सभी कक्षाएं शुरू होंगी। स्कूल में दो हजार छात्रों का एडमिशन हो सकेगा। इस स्कूल में सीनियर सेकेंडरी के बच्चे साइंस, कॉमर्स, आर्ट और वोकेशनल विषयों में पढ़ाई कर पाएंगे।

अब इलाके के बच्चों को शिक्षा के लिए नहीं जाना होगा दूर

इस स्कूल में नई बिल्डिंग के बन जाने और बच्चों के एडमिशन की क्षमता बढ़ जाने से यहां आसपास रहने वाले बच्चों को बहुत फायदा होगा। अभी तक लिबासपुर, जीवन पार्क, राणा पार्क, भगत सिंह पार्क, संजय कॉलोनी, स्वरूप नगर में रहने वाले बच्चों को समयपुर और सीतापुर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए लगभग 3-4 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

स्कूल में मुक्केबाजी और कुश्ती को भी मिलेगा बढ़ावा

इस नए स्कूल में खेल सुविधाओं का भी विशेष ख्याल रखा गया है। इस इलाके में रहने वाले उन छात्रों को बहुत फायदा होगा, जो मुक्केबाजी और कुश्ती में अपनी रुचि रखते हैं। मुक्केबाजी और कुश्ती में रुचि रखने वाले बच्चों को बढ़ावा देने के लिए स्कूल के अंदर उच्च स्तर की अत्याधुनिक सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। स्कूल में शानदार मुक्केबाजी प्रशिक्षण केंद्र और एक कुश्ती हॉल बनाया गया है। सरकार द्वारा दी गई इन सुविधाओं का उद्देश्य मुक्केबाजी और कुश्ती खेलों के लिए छात्रों के अंदर मौजूद जुनून को बढ़ावा देकर उनकी प्रतिभा को निखारना है। ऐसे बच्चों को उच्च गुणवत्ता का आहार, शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और खेल कौशल को बढ़ावा दिया जाएगा।