मेवाड़ राजपरिवार संपत्ति विवाद : भाई-बहन के दावों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पक्ष की याचिका की खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेवाड़ राजपरिवार से जुड़े एक अहम संपत्ति विवाद में राजकुमारी पद्मजा कुमारी परमार की याचिका खारिज कर दी। पद्मजा कुमारी ने अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के प्रबंधन के लिए लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन देने की मांग की थी।

दिल्ली HC ने कहा, पद्मजा कुमारी की अर्जी कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि पद्मजा कुमारी की ओर से दायर की गई याचिका कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जो भी आपत्तियां पद्मजा कुमारी अपने भाई द्वारा पेश की गई वसीयत पर उठा रही हैं, उन्हें उसी मामले में उठाया जा सकता है जो उनके भाई ने कोर्ट में दाखिल किया है।

दरअसल, यह पूरा विवाद मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार और उदयपुर की संपत्तियों को लेकर है। पद्मजा कुमारी के भाई लक्ष्यराज सिंह का दावा है कि उनके पिता अरविंद सिंह मेवाड़ ने अपनी स्वयं अर्जित संपत्ति की वसीयत उनके नाम कर दी थी और उन्हें ही एकमात्र वारिस बनाया है। वहीं, पद्मजा कुमारी ने अदालत में यह दलील दी कि ऐसी कोई वैध वसीयत मौजूद नहीं है।

उनका कहना है कि जो वसीयत उनके भाई ने पेश की है, वह उस समय बनाई गई थी जब उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उन पर दबाव भी डाला गया था। दोनों भाई-बहन ने अपने-अपने पक्ष को लेकर हाई कोर्ट में अलग-अलग टेस्टामेंटरी केस दायर किए थे और पिता की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मांगा था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भाई द्वारा पेश की गई वसीयत की वैधता को लेकर अब विवाद पैदा हो चुका है और इसे इंडियन सक्सेशन एक्ट की धारा 295 के तहत उसी मामले में तय किया जाना चाहिए, जिसमें वसीयत पेश की गई है। कोर्ट ने कहा कि अगर एक ही मुद्दे पर अलग-अलग मामलों में सुनवाई होगी तो विरोधाभासी फैसले आने की संभावना हो सकती है, जो कानून की मंशा के खिलाफ है।

हालांकि, कोर्ट ने पद्मजा कुमारी को पूरी तरह से निराश नहीं किया। कोर्ट ने उन्हें यह छूट दी है कि वे अपने भाई द्वारा दायर मामले में वसीयत की वैधता को चुनौती दे सकती हैं और सभी आपत्तियां वहां उठा सकती हैं। इस फैसले के बाद अब मेवाड़ राजपरिवार की इस बहुचर्चित संपत्ति लड़ाई का मुख्य कानूनी विवाद भाई लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ द्वारा दायर केस में ही आगे बढ़ेगा, जहां कोर्ट यह तय करेगी कि अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत वैध है या नहीं।

First Published on: March 18, 2026 9:55 AM
Exit mobile version