राजभाषा सहित भारतीय भाषाओं के लिए संकल्प से सिद्धि की आवश्यकता: प्रो निरंजन कुमार

इस दौरान मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. जगदेव कुमार शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि अपनी भाषा में अभिव्यक्ति सरल एवं सहज होती है। इसी कारण विभिन्न महत्पूर्ण पुस्तक जैसे रामचरितमानस आदि अपनी भाषा में ही लिखी गई हैं।

नई दिल्ली। राजभाषा कार्यान्वयन समिति, राजधानी महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) के त्रिदिवसीय राजभाषा कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की शुरुआत भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष व दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो निरंजन कुमार द्वारा दिए गये उद्बोधन के माध्यम से राजाभाषा सहित भारतीय भाषाओं के लिए संकल्पबद्ध होने के साथ हुई।

इसके बाद राजस्थानी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राजेश गिरी ने अपने स्वागत भाषण में राजभाषा की महत्ता बताते हुए इसे व्यवहार में लाने पर जोर दिया। उन्होंने अपने निजी अनुभवों एवं विभिन्न समकालीन उदाहरणों के माध्यम से राजभाषा , अर्थात अपने जड़ों से जुड़े रहने के विभिन्न लाभ बताए।

उन्होंने राजभाषा की दशा एवं दिशा पर चिंता व्यक्त किया। उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता मुक्त होने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व के विभिन्न शक्तिशाली देश अपनी भाषा का हर प्रकार से प्रयोग करते है, क्योंकि अपनी भाषा में संप्रेषण सरल एवं शीघ्र होता है।

इस दौरान मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. जगदेव कुमार शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि अपनी भाषा में अभिव्यक्ति सरल एवं सहज होती है। इसी कारण विभिन्न महत्पूर्ण पुस्तक जैसे रामचरितमानस आदि अपनी भाषा में ही लिखी गई हैं। उन्होंने हिंदी के राजभाषा के रूप में अपनाए जाने के इतिहास का संक्षिप्त परिचय देते हुए नई शिक्षा नीति में भारतीए भाषाओं का पठन पाठन पर जोर दिया जाने पर हर्ष व्यक्त किया।

सत्र के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेश गिरि ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए राजभाषा का अपने कार्य-व्यवहार में प्रयोग के लिए प्रेरित करते हुए कार्यशाला के सफलता के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं|

त्रिदिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेश गिरि, प्रो सुमन कुमार, प्रो वर्षा गुप्ता, राजभाषा समन्वयक डॉ वेद मित्र शुक्ल, राकेश त्रिपाठी आदि की कार्यशाला में विशेष सहभागिता रही। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ मानसी ने किया।

First Published on: December 14, 2022 7:58 PM
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