संस्कृति मंत्रालय के सचिव द्वारा साहित्य अकादेमी बुक स्टॉल का निरीक्षण

नई दिल्ली। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में संस्कृति मंत्रालय के पवेलियन में साहित्य अकादेमी के बुक स्टॉल पर आज संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल पधारे। अग्रवाल का स्वागत एवं अभिनंदन साहित्य अकादेमी की सचिव पल्लवी प्रशांत होळकर ने साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें एवं पुष्पगुच्छ भेंट करके किया।

इसके बाद पल्लवी ने साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित 24 भारतीय भाषाओं के प्रकाशनों के बारे में सचिव महोदय को विस्तार से बताया। अग्रवाल ने संस्कृति मंत्रालय पवेलियन में लगे अन्य संस्थाओं के स्टॉल का निरीक्षण भी किया और कई पुस्तकप्रेमियों से बातचीत की।

‘लेखक मंच’ पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की शृंखला में आज साहित्य अकादेमी द्वारा ‘आमने-सामने’ और ‘नारी चेतना (बहुभाषी रचना-पाठ)‘ कार्यक्रम आयोजित किए गए। ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत दो लेखकों अरविंद कुमार तिवारी (संस्कृत) और एल. रामेश्वर सिंह (मणिपुरी) ने श्रोताओं के समक्ष अपनी रचना-प्रक्रिया साझा की, साथ ही अपनी रचनाओं का पाठ भी किया।

‘नारी चेतना (बहुभाषी काव्य- पाठ)’ कार्यक्रम में पंजाबी की प्रख्यात कवयित्री वनीता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और बाङ्ला कवयित्री त्रिना चक्रवर्ती, हिंदी कवयित्री अंकिता रासुरी, मैथिली कवयित्री आभा झा, संस्कृत कवयित्री मीरा द्विवेदी और उर्दू कवयित्री रेशमा ज़ैदी ने अपनी-अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं।

संस्कृत बाल साहित्यकार अरविंद कुमार तिवारी ने अपनी रचना-प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि किसी भी रचना का सृजन सही स्थान, देश-काल और परिस्थिति से होता है। मैं ग्रामीण अंचल से आता हूँ। गाँव के मंदिर में प्रसाद के लालच में मुझे जो रामायण सुनने को मिली, वहीं से मेरे अंदर लेखन का बीज प्रस्फुटित हुआ।

मैंने ‘रामायण’ को ही अपने लेखन का माध्यम बनाया और अपनी लिखी रामायण में माता कैकेयी को दोषमुक्त कर दिया। मैंने अभिनव भारत के बदलते रूप को ‘स्वभारतम महीयते’ में लिखा।

उन्होंने ‘काव्यरत्नावली’ कविता संग्रह से अपनी कविता भी प्रस्तुत की और अंत में कहा कि कविता का जन्म परिस्थितियों से होता है और कवि का अंतर्द्वंद्व उसे कविता लिखने के लिए प्रेरित करता है।

प्रख्यात मणिपुरी लेखक एल. रामेश्वर सिंह ने सोफोक्लीज के नाटक के अपने मणिपुरी अनुवाद के अनुभव को श्रोताओं के साथ साझा किया। यह अनूदित नाटक मणिपुर विश्वविद्यालय के स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उन्होंने इस यूरोपियन क्लासिक का सारांश प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस नाटक से हमारी मणिपुरी संस्कृति भी जुड़ी हुई है। ‘लायहरोबा‘ हमारी एक सांस्कृतिक परंपरा है जो इस नाटक की त्रासदी से मिलती-जुलती है।

‘नारी चेतना’ कार्यक्रम में बाङ्ला की कवयित्री त्रिना चक्रवती ने पहली कविता ‘मेटीर हाथ’ (उसकी हथेलियाँ) बाङ्ला में, फिर उसका हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया। शेष कविताएँ हिंदी में प्रस्तुत कीं – ‘उदासी दूर करने के तरीक़े‘ और ‘चूड़ी‘। हिंदी की युवा कवयित्री अंकिता रासुरी ने अपने कविता-संग्रह ‘अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया‘ से इसी शीर्षक की कविता, और ‘किसी क़रीबी का जाना‘, ‘शोकाकुल‘, ‘तेरहवीं क्या है‘ सहित सात कविताएँ प्रस्तुत कीं।

मैथिली की प्रख्यात कवयित्री आभा झा ने ‘विश्वासक खंडहर‘, जो टूटे परिवार के बच्चे की कहानी है और ‘न्यूरोटिक‘ कविता मैथिली में तथा ‘द्वंद्व‘ कविता हिंदी में प्रस्तुत की, जो औरत के द्वंद्व पर आधारित थी।

संस्कृत की प्रख्यात कवयित्री मीरा द्विवेदी ने ‘सत्य छुपा आवरण मध्य‘ कविता पहले संस्कृत में फिर हिंदी अनुवाद प्रस्तुत की, जो तल्ख शब्दों में सत्य की कसौटी को कसती है।

उर्दू की शायरा रेशमा जै़दी ने ‘चिराग़ इश्क़ जला लूँ तो कोई बात करूँ‘ और एक नज़्म ‘मैं क्या औरत हूँ‘ प्रस्तुत की। पंजाबी की प्रख्यात कवयित्री एवं पंजाबी परामर्श मंडल की सदस्य और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही वनीता ने सभी कवयित्रियों की कविताओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी स्त्री रचनाकारों ने अपने-अपने शब्दों में आधुनिक नारी के विचार और सोच को प्रस्तुत किया है जो एक बड़े बदलाव की आहट है।

उन्होंने अपनी पंजाबी कविता ‘संगना बिर्ख‘ और हिंदी में एक कविता ‘कैंडी क्रश‘ प्रस्तुत की। नारी चेतना के आरंभ में साहित्य अकादेमी द्वारा नवोदय योजना के अंतर्गत प्रकाशित अंकिता रासुरी के काव्य संग्रह ‘अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया’ का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रमों का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अजय कुमार शर्मा ने किया।

First Published on: January 18, 2026 10:32 AM
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