क्या कोई कलक्टर बिना रिश्वत लिए काम नहीं करता?

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मध्य प्रदेश Updated On :

मध्यप्रदेश में हाल में कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं। कुछ अखबारों में छपा कि मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री ने बताया है कि प्रदेश में एक भी कलक्टर ऐसा नहीं है जो बिना रिश्वत लिए काम करता हो। इस तरह की बात प्रदेश क्या, संभवतः पूरे देश में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने कही होगी।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंत्री अलग-अलग जिलों में झंडा फहराने के लिए जाते हैं। कौनसा मंत्री किस जिले में जाएगा इसकी सूची मुख्यमंत्री बनाते हैं। इस साल रतलाम जिले में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने के लिए जिस मंत्री को चुना गया उसके बारे में जिले के लोगों ने कहा कि हमें ऐसा मंत्री नहीं चाहिए जिसने एक महिला फौजी अफसर को अपमानित किया हो।

उक्त मंत्री ने महिला अफसर के बारे में जो अपमानजनक बातें कही थीं वे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई हैं। रतलाम के लोगों ने इस मुद्दे पर इतना शोर मचाया कि अंततः मुख्यमंत्री ने इस मंत्री को रतलाम से हटाकर खंडवा में गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार से कहा है कि वह तय कर ले कि इस मंत्री के बारे में उसे क्या करना है।

कई दशक पहले राज्य के एक मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र से जब पूछा गया कि मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के परस्पर संबंध कैसे होने चाहिए तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया कि जैसे पति-पत्नी के बीच होते हैं। उनके ये शब्द इस समय इसलिए याद आ रहे हैं क्योंकि अखबारों में छपे समाचारों के अनुसार, मुख्य सचिव ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री ने बताया है कि प्रदेश में एक भी ऐसा कलक्टर नहीं है जो बिना रिश्वत लिए काम करता हो।

सभी कलक्टरों पर उंगली उठाने का इतना गंभीर आरोप पहले शायद ही कभी लगा हो। इस पर बहुत शोर मच रहा है और यह मांग उठ रही है कि चूंकि सभी कलक्टर भ्रष्ट हैं तो क्यों न सभी को हटा दिया जाए। कुछ पार्टियां तो कह रही हैं कि जिस मुख्यमंत्री के राज में सभी कलक्टर भ्रष्ट हो गए हैं ऐसे मुख्यमंत्री को भी क्यों न हटा दिया जाए। इस संबंध में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को कोई बात व्यक्तिगत चर्चा में बताते हैं तो क्या मुख्य सचिव को उसे सार्वजनिक करना चाहिए।

मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के बीच प्रगाढ़ संबंधों की जरूरत द्वारका प्रसाद मिश्र ने बताई थी। उसके बाद मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के बीच संबंध पहली बार तनावपूर्ण तब बने जब अर्जुन सिंह ने मुख्यमंत्री बनते ही मुख्य सचिव को निलंबित कर दिया। ये मुख्य सचिव थे बी. के. दुबे, जो अपने दबंग स्वभाव के लिए जाने जाते थे। अर्जुन सिंह को संदेह था कि बी. के. दुबे की वफादारी उनके प्रति नहीं है। दुबे पहले से ही विद्याचरण शुक्ल, जो उस समय केन्द्रीय मंत्री थे, से जुड़े हुए हैं, यह संदेह अर्जुन सिंह को था। इसी के चलते उन्होंने बी. के. दुबे को मुख्य सचिव के पद से निलंबित कर दिया था। बाद में दुबे, अर्जुन सिंह के इस आदेश के विरूद्ध हाईकोर्ट गए थे।

हाल में कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा अपनी जुबान पर काबू नहीं रखने की कुछ घटनाएं भी हुई हैं। इनमें से कुछ नेता भाजपा के हैं और कुछ कांग्रेस के। कांग्रेस के एक नेता हैं फूल सिंह बरैया। उन्होंने बलात्कार और उस तरह के अन्य अपराधों के बारे में बोलते हुए कुछ अत्यधिक आपत्तिजनक बातें कहीं, जिनके विरूद्ध भाजपा के लोगों ने हल्ला मचाया। बाद में उनकी तरफ से स्पष्टीकरण देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो कुछ भी बरैया ने कहा है कि वह उनके अपने विचार नहीं हैं वह तो एक पुस्तक के उद्धरण हैं।

यह बात कितनी सही है अभी तक यह तय नहीं हो पाया है। भाजपा के नेताओं द्वारा कही गई बातें भी अभी तक गूंज रही हैं। जैसे इंदौर में प्रदूषित पानी के कारण हुई मौतों के बारे एक पत्रकार के प्रश्न का जवाब देते हुए वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ‘‘तू वहां गया क्यों’’। उसके बाद उनके खिलाफ पूरे प्रदेश क्या, देश में भी हल्ला मच गया था।



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