लखनऊ। किसानों पर जारी दमन, आंदोलन को बदनाम करने, किसान नेताओं, पत्रकारों व बुद्धिजीवियों पर देशद्रोह जैसी धाराओं में मुकदमें दर्ज करने के खिलाफ आज संयुक्त किसान मोर्चा के आहवान पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट और जय किसान आंदोलन से जुड़े मजदूर किसान मंच के कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश में दमन विरोधी दिवस मनाया।
कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति महोदय को पत्र भेजकर तीनों काले कृषि कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल खरीद के लिए कानून बनाने, यूएपीए, एनएसए, देशद्रोह जैसे काले कानूनों को खत्म करने, आंदोलन में गिरफ्तार सभी किसानों को बिना शर्त रिहा करने, किसान नेताओं पर लगाए सभी मुकदमें वापस लेने, राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले पर रोक लगाने और असहमति के अधिकार की रक्षा करने जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी ने पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को दिल्ली जिला न्यायालय द्वारा जमानत मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने और उसका दमन करने का सरकार का हर प्रयास विफल होता जा रहा है।
मजदूर किसान मंच के महासचिव डा. बृज बिहारी ने कहाकि “किसानों के जारी आंदोलन को मिल रहे भारी समर्थन ने देश में मोदी सरकार द्वारा तानाशाही थोपने की कोशिशों पर विराम लगाने का काम किया है। सरकार को चाहिए कि वह कारपोरेट हितों के लिए किसानों पर दमन करने के बजाए किसानों से वार्ता करें और किसानों के सवालों को हल करे।”
